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Health News: कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत, अब सिर्फ 7 मिनट में होगी इम्यूनोथेरेपी, फेफड़ों के कैंसर के इलाज में आया नया गेमचेंजर

Health News: फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बड़ी उम्मीद और राहत की खबर सामने आई है।....

7 Minute Lung Cancer Immunotherapy Launched in India
कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत- फोटो : social Media

Health News: फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बड़ी उम्मीद और राहत की खबर सामने आई है। अब अस्पतालों में घंटों बैठकर इलाज कराने की मजबूरी काफी हद तक खत्म हो सकती है। दुनिया की पहली सबक्यूटेनियस (त्वचा के नीचे दी जाने वाली) इम्यूनोथेरेपी भारत में शुरू कर दी गई है, जिससे इलाज का समय नाटकीय रूप से घटकर महज 7 मिनट रह जाएगा।

स्विट्जरलैंड की दिग्गज फार्मा कंपनी Roche ने टेसेंट्रिक SC (Atezolizumab) लॉन्च किया है। कंपनी के अनुसार इस नई तकनीक से उपचार में लगने वाला समय लगभग 80 प्रतिशत तक कम हो जाएगा, जिससे मरीजों और अस्पतालों दोनों को सुविधा मिलेगी।भारत में इस दवा को तीन महीने पहले ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने एडवांस्ड और मेटास्टैटिक नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC) के उपचार के लिए मंजूरी दी थी। एक डोज की कीमत लगभग 3.7 लाख रुपये है और इसे हर 21 दिन पर दिया जाता है। यह सुविधा CGHS लाभार्थियों के लिए भी उपलब्ध बताई गई है।

अब तक एटेजोलिज़ुमैब जैसी इम्यूनोथेरेपी आमतौर पर नसों (IV Infusion) के जरिए दी जाती थी, जिसमें काफी समय लगता था। नई सबक्यूटेनियस तकनीक में दवा त्वचा के नीचे इंजेक्ट की जाती है, जिससे उपचार की प्रक्रिया कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाती है।डॉ. रोहित उपाध्याय के अनुसार, यह दवा कैंसर को पूरी तरह खत्म करने वाला स्थायी इलाज नहीं है। यह एक उन्नत इम्यूनोथेरेपी है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है ताकि वह कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उनसे लड़ सके।इसका मुख्य उद्देश्य ट्यूमर की वृद्धि को धीमा करना,कैंसर के फैलाव को रोकना,मरीज की जीवन गुणवत्ता बेहतर करना, सर्वाइवल अवधि बढ़ाना है। विशेषज्ञों के अनुसार इसे आमतौर पर 1 से 2 वर्ष तक या तब तक दिया जाता है जब तक बीमारी नियंत्रित रहती है।

अनुमान के अनुसार भारत में हर वर्ष करीब 80,000 लोग फेफड़ों के कैंसर से प्रभावित होते हैं। धूम्रपान और वायु प्रदूषण इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि 80-90 प्रतिशत मरीजों में बीमारी का पता तब चलता है जब कैंसर उन्नत अवस्था में पहुंच चुका होता है।

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आईजीआईएमएस के डॉ. रोहित उपाध्याय ने कहा कि यह नवाचार उपचार की प्रभावशीलता और सुरक्षा बनाए रखते हुए मरीजों का समय बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।कुल मिलाकर, यह नई इम्यूनोथेरेपी कैंसर उपचार में एक महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है, जो विशेष रूप से उन मरीजों के लिए राहत लेकर आई है जिन्हें लंबे समय तक अस्पताल में बैठकर उपचार कराना पड़ता था। हालांकि विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि इसे कैंसर का चमत्कारी या स्थायी इलाज नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह आधुनिक उपचार विकल्पों में एक महत्वपूर्ण कदम है।