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नियमों को ताक पर रखकर बनीं DGP? तदाशा मिश्रा के कार्यकाल विस्तार को UPSC ने ठहराया गलत

UPSC और राज्य सरकार के बीच डीजीपी की नियुक्ति को लेकर तकरार और तेज हो गई है। आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए 1994 बैच की आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा के सेवा विस्तार को 'अवैध' घोषित कर दिया है

नियमों को ताक पर रखकर बनीं DGP? तदाशा मिश्रा के कार्यकाल विस

N4N Desk : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य सरकार के बीच डीजीपी की नियुक्ति और सेवा विस्तार को लेकर टकराव बढ़ गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नियमों को ताक पर रखकर दी गई नियुक्तियां वैध नहीं हैं और राज्य को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

UPSC ने जताई कड़ी आपत्ति

संघ लोक सेवा आयोग ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर 1994 बैच की आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा के सेवा विस्तार को नियमों के विरुद्ध घोषित किया है। आयोग का कहना है कि तदाशा मिश्रा 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो चुकी हैं, ऐसे में उन्हें दिया गया विस्तार कानूनन सही नहीं है। यूपीएससी ने राज्य सरकार द्वारा बनाई गई नई नियमावली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

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पैनल प्रणाली का पालन अनिवार्य

आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया है कि डीजीपी की नियुक्ति केवल यूपीएससी द्वारा चयनित पैनल के आधार पर ही होनी चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार को योग्य आईपीएस अधिकारियों की सूची आयोग को भेजनी होगी। इसी सूची में से शॉर्टलिस्ट किए गए अधिकारियों के पैनल में से ही अंतिम चयन किया जा सकता है। आयोग ने चेतावनी दी है कि इस प्रक्रिया से बाहर जाकर की गई कोई भी नियुक्ति मान्य नहीं होगी।

विवाद की मुख्य वजह


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विवाद की जड़ वह फैसला है जिसमें तदाशा मिश्रा की सेवानिवृत्ति से महज दो दिन पहले राज्य सरकार ने नियमावली में संशोधन कर दिया। इस संशोधन के जरिए उन्हें दो साल का सेवा विस्तार दे दिया गया। सरकार के इस कदम को यूपीएससी ने अब औपचारिक रूप से चुनौती दी है, जिससे शासन और आयोग के बीच तल्खी बढ़ गई है।

पुराने मामलों का भी दिया हवाला

यह पहली बार नहीं है जब राज्य सरकार और यूपीएससी आमने-सामने हैं। इससे पहले 1990 बैच के अधिकारी अनुराग गुप्ता को दिए गए सेवा विस्तार पर भी आयोग ने आपत्ति जताई थी। उस समय भी नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया गया था। अनुराग गुप्ता के हटने के बाद ही तदाशा मिश्रा को पहले प्रभारी और फिर सेवानिवृत्ति से ठीक पहले नियमित डीजीपी बनाया गया था।

नियमों की अनदेखी पर सवाल

यूपीएससी के कड़े रुख ने राज्य सरकार की चयन प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आयोग का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार डीजीपी का कार्यकाल और चयन पारदर्शी होना चाहिए। अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है कि वह आयोग की आपत्तियों के बाद नियमों में बदलाव करती है या टकराव का यह सिलसिला जारी रहता है।