LATEST NEWS

  • Bihar Ration Card
  • Bihar Ration Card:बिहार में 35 लाख से ज्यादा राशन कार्ड रद्द! चेक कर लीजिए लिस्ट में आपका

  • Bihar MLC Election Results
  • Bihar MLC Election Results : 150 प्रत्याशियों की धड़कनें तेज, आज खुलेगा सियासी किस्मत का पिटारा,देर रात तक

  • Bihar Weather: बिहार में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, आज पटना समेत इन इलाकों में बिगड़ेगा मौसम, गरज-चमक के साथ तूफान की आहट!
  • Bihar Weather: बिहार में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, आज पटना समेत इन इलाकों में बिगड़ेगा मौसम, गरज-चमक

  • Naubatpur Traffic
  • Naubatpur Traffic: पटना के नौबतपुर में ट्रैफिक जाम पर उठे सवाल, CCTV फुटेज जांचने की मांग

  • Gaya Police News
  • Gaya Police News: गया में गांधी नगर जमीन विवाद में एसएसपी की बड़ी कार्रवाई, ADG की खबरों

कहानी आदिवासियों के मसीहा की, जिन्होंने ओलंपिक में भारत के लिए जीता था पहला गोल्ड

जयपाल सिंह मुंडा, भारतीय हॉकी के एक ऐसे नायक हैं जिन्हें इतिहास ने भुला दिया है। उन्होंने 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का नेतृत्व किया और भारत को पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाया।

जयपाल सिंह मुंडा,

Jaipal Singh Munda: जब भी भारत के ओलंपिक स्वर्ण पदकों की बात आती है, तो अक्सर ध्यान 1948 के लंदन ओलंपिक में हॉकी टीम की जीत पर जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का पहला ओलंपिक स्वर्ण 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में आया था और उस ऐतिहासिक टीम के कप्तान जयपाल सिंह मुंडा थे, जिनका नाम इतिहास के पन्नों में कहीं खो गया है।

आदिवासी नायक जिन्होंने भारत को उसका पहला स्वर्ण दिलाया

झारखंड के खूंटी जिले में जन्मे जयपाल सिंह मुंडा न केवल हॉकी खिलाड़ी थे, बल्कि एक प्रखर राजनीतिज्ञ, शिक्षाविद् और आदिवासी समुदाय की एक सशक्त आवाज भी थे। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हॉकी में महारत हासिल की और 1928 के ओलंपिक टीम का नेतृत्व करने के लिए भारत लौट आए। उस समय नीदरलैंड में आयोजित ओलंपिक में भारत ने नीदरलैंड को 8-0 से हराकर इतिहास रच दिया था।

टीम को जिताया लेकिन खुद कप्तानी छोड़नी पड़ी

जयपाल सिंह मुंडा का करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। 1928 के ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद भी उन्हें टीम में मतभेदों के कारण टीम छोड़नी पड़ी। उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों के साथ अपने मतभेदों को खुलकर व्यक्त किया, जो उस समय के खिलाड़ियों के लिए असामान्य था।

आदिवासी अधिकारों के लिए बुलंद आवाज

हॉकी से दूर रहने के बाद जयपाल सिंह मुंडा राजनीति में आए और आदिवासी अधिकारों के लिए लड़ाई शुरू की। उन्होंने संविधान सभा में आदिवासी समुदाय की समस्याओं को उठाया और 'आदिवासी महासभा' की स्थापना की। उन्होंने झारखंड राज्य के गठन का सपना देखा, जो सालों बाद साकार हुआ।

NSIT
Nsmch

इतिहास में खो गए जयपाल सिंह मुंडा

जयपाल सिंह मुंडा की कहानी का सबसे दुखद पहलू यह है कि देश को पहला स्वर्ण दिलाने वाले इस महान नायक का नाम खेल इतिहास में वह स्थान नहीं पा सका जिसके वे हकदार थे। जयपाल सिंह मुंडा का योगदान भारतीय हॉकी के स्वर्णिम इतिहास में कहीं दब गया। आज जब भारत खेलों में नई ऊंचाइयों को छू रहा है, तो जयपाल सिंह मुंडा जैसे गुमनाम नायकों को याद करना और उनका सम्मान करना समय की मांग है। वे न केवल खेलों में बल्कि सामाजिक सुधार और राजनीति में भी बदलाव के प्रतीक थे। "जयपाल सिंह मुंडा का नाम न केवल इतिहास में बल्कि हर भारतीय के दिल में अंकित होना चाहिए।"