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चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की चांदी: बिना परीक्षा क्लर्क बनने का रास्ता होगा साफ? सरकार ले सकती है बड़ा फैसला

झारखंड सरकार चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को उनकी अर्हता के आधार पर बिना परीक्षा लिए लिपिक (clerk) के पद पर नियुक्त करने पर विचार कर रही है। इसके लिए बिहार में लागू व्यवस्था का अध्ययन किया जा रहा है।

चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की चांदी: बिना परीक्षा क्लर्क बनने का

N4N Desk - झारखंड सरकार चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को उनकी अर्हता के आधार पर बिना परीक्षा लिए लिपिक (clerk) के पद पर नियुक्त करने पर विचार कर रही है। इसके लिए बिहार में लागू व्यवस्था का अध्ययन किया जा रहा है। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक रामचंद्र सिंह ने चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों की पदोन्नति का मामला जोर-शोर से उठाया। 

उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार राज्य के ग्रुप-डी कर्मचारियों को उनकी शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के आधार पर बिना किसी लिखित परीक्षा के लिपिक के पद पर नियुक्त करने की योजना बना रही है? इस सवाल ने सदन का ध्यान उन हजारों कर्मचारियों की ओर खींचा जो लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं।

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बिहार मॉडल का अध्ययन कर रही है सरकार

विधायक के सवाल पर राज्य सरकार की ओर से सकारात्मक जवाब आया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि पड़ोसी राज्य बिहार में पहले से ही यह व्यवस्था लागू है, जहाँ ग्रुप-डी कर्मियों को कुछ शर्तों के साथ सीधे लिपिक बनाया जाता है। झारखंड के कार्मिक विभाग ने अब बिहार सरकार से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है ताकि वहां की नियमावली का अध्ययन कर इसे झारखंड में भी लागू किया जा सके।

वर्तमान में क्या है नियुक्ति का प्रावधान?

झारखंड में वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, लिपिकीय संवर्ग (Clerical Cadre) में बहाली के दो मुख्य तरीके हैं:

  • NSIT
    Nsmch

    85% सीधी नियुक्ति: लिपिकों के कुल पदों में से 85 प्रतिशत पदों पर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के माध्यम से सीधी भर्ती की जाती है।

  • 15% सीमित प्रतियोगिता परीक्षा: शेष 15 प्रतिशत पद चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों के लिए आरक्षित हैं, लेकिन उन्हें इसके लिए 'सीमित प्रतियोगिता परीक्षा' उत्तीर्ण करनी होती है। सरकार अब इसी 15 प्रतिशत कोटे के लिए परीक्षा की अनिवार्यता को खत्म करने या नियमों को सरल बनाने पर विचार कर रही है।


  • झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की भूमिका

अभी तक के नियमों के तहत, जब भी चतुर्थ श्रेणी से लिपिक के पदों पर प्रोन्नति की बात आती है, तो जेएसएससी (JSSC) द्वारा सीमित प्रतियोगिता परीक्षा का आयोजन किया जाता है। कई कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि जो कर्मी सालों से विभाग में सेवा दे रहे हैं और स्नातक या अन्य आवश्यक योग्यता रखते हैं, उन्हें अनुभव के आधार पर सीधे प्रोन्नति मिलनी चाहिए। सरकार का यह नया रुख इसी मांग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

कर्मचारियों में उत्साह और आगामी प्रक्रिया

सरकार के इस जवाब के बाद सचिवालय से लेकर क्षेत्रीय कार्यालयों तक के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। यदि बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी बिना परीक्षा प्रोन्नति का रास्ता साफ होता है, तो इससे न केवल कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि प्रशासनिक कामकाज में अनुभवी लोगों की सेवाएं लिपिकीय स्तर पर मिल सकेंगी। कार्मिक विभाग की रिपोर्ट आने के बाद इस पर अंतिम मुहर लग सकती है।