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Bihar Election 2025: बिहार में 2005 के पहले और बाद क्या रही महिलाओं की स्थिति, चुनाव प्रचार के आखिरी दिन सीएम नीतीश का बड़ा संदेश, जानिए....

Bihar Election 2025: 24 नवंबर 2005 को राज्य में जब नई सरकार का गठन हुआ, तब से हमलोग महिला शिक्षा एवं उनके विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। महिलाओं को रोजगार देने एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

सीएम नीतीश
सीएम नीतीश का संदेश - फोटो : News4nation

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का प्रचार प्रसार आज शाम खत्म हो जाएगा। 11 नवंबर को दूसरे चरण का मतदान होना है। आज चुनाव प्रचार के आखिरी दिन सभी नेताओं ने ताकत झोंक दी है। ताबड़तोड़ रैलियां हो रही है। 14 नवंबर को मतगणना होनी है। वहीं चुनाव के आखिरी दिन सीएम नीतीश ने बिहार की जनता को खास संदेश दिया है। उन्होंने लालू सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 2005 से पहले महिलाओं के उत्थान के लिए कोई काम नहीं होता था।  2005 के बाद महिलाओं के लिए काम शुरु किया गया।  सीएम नीतीश ने ट्विट कर बिहार की जनताओं की ध्यान इस ओर खींची है।

2005 के पहले महिलाओं की स्थिति 

उन्होंने ट्विट कर लिखा कि, बिहार में वर्ष 2005 से पहले महिलाओं के उत्थान के लिए कोई काम नहीं होता था। महिलाएं घर की चहारदीवारी से बाहर नहीं निकल पाती थीं। शाम 6 बजे के बाद सड़कों पर महिलाओं का निकलना बिल्कुल असुरक्षित था। सत्ता संरक्षित अपराधी इतने बेखौफ हो चुके थे कि लड़कियां स्कूल-कॉलेज जाने में भी डरती थीं। अगर कोई बेटी स्कूल जाती थी तो उनके माता-पिता तब तक परेशान रहते थे, जब तक बेटी वापस घर नहीं लौट जाती थी। लड़कियों की शिक्षा के लिए कोई विशेष इंतजाम नहीं था तथा बहुत कम संख्या में बेटियां पढ़ पाती थीं। राज्य के अधिकांश हिस्सों में खासकर ग्रामीण इलाकों की होनहार बच्चियां प्रारंभिक शिक्षा के बाद आगे की पढ़ाई नहीं कर पाती थीं। सरकार को राज्य की आधी आबादी की कोई चिंता नहीं थी और न ही उन्हें समाज में उचित प्रतिनिधित्व तथा मान-सम्मान मिलता था। 

महिलाओं के लिए उठाए गए कई कदम 

24 नवंबर 2005 को राज्य में जब नई सरकार का गठन हुआ, तब से हमलोग महिला शिक्षा एवं उनके विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। महिलाओं को रोजगार देने एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। अब राज्य की महिलाएं अपनी मेहनत से न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं बल्कि वे प्रदेश की प्रगति में भी अपना योगदान दे रही हैं। हमलोगों ने सबसे पहले वर्ष 2006 में पंचायती राज संस्थाओं एवं वर्ष 2007 में नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया। अब तक 4 चुनाव हो चुके हैं, बड़ी संख्या में महिलाएं मुखिया, सरपंच, पंच, जिला परिषद अध्यक्ष, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य, नगर निगम मेयर, नगर परिषद तथा नगर पंचायत अध्यक्ष पदों पर चुनकर आ रही हैं। इससे समाज में बहुत बड़ा परिवर्तन आया है। जो महिलाएं आमतौर पर घरों में सिमटी रहती थीं, अब वे इन सभी कामों में अपनी सीधी सहभागिता सुनिश्चित कर रही हैं। यह एक बहुत ही प्रभावी सामाजिक परिवर्तन है। 

 पुलिस बहाली में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण 

इसके साथ ही वर्ष 2013 से ही पुलिस बहाली में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तथा महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए बिहार पुलिस में महिला सिपाहियों की बड़ी संख्या में नियुक्ति की गई। बिहार पुलिस में महिलाओं की भागीदारी आज देश में किसी भी राज्य से ज्यादा है। वर्ष 2016 से हमलोगों ने सभी सरकारी नौकरियों में राज्य की महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान कर दिया। इसके अलावा प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। इससे सभी सरकारी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इसके अलावा राज्य के इंजीनियरिंग एवं मेडिकल कॉलेजों में नामांकन में भी लड़कियों को 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। 

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 कन्या उत्थान योजना के तहत बेटियों को मिली शिक्षा 

लड़कियों की शिक्षा के लिए भी हमलोगों ने कई काम किए हैं। कन्या उत्थान योजना के तहत राज्य में बेटी के जन्म से लेकर उनके स्नातक तक की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। बेटी के जन्म पर उनके माता-पिता को दो हजार रुपए, बेटी की उम्र एक वर्ष पूरा होने पर आधार निबंधन के बाद माता-पिता को एक हजार रुपए तथा बच्ची की उम्र दो वर्ष पूरा होने पर वैक्सीनेशन के लिए माता-पिता को दो हजार रुपए दिए जाते हैं। इस प्रकार से बेटी के जन्म से लेकर उनके दो वर्ष की उम्र तक हर माता-पिता को 5 हजार रुपए दिए जाते हैं। इसके बाद जब बच्ची आंगनबाड़ी केंद्र या विद्यालय जाना शुरू करती है, तो उसके पोषण का भी उचित ध्यान रखा जाता है। बेटियों के पोषाहार तथा पोशाक के लिए राशि दी जाती है। पहली कक्षा से ही बेटियों को पोशाक राशि के लिए पैसे तथा मुफ्त में किताबें दी जाती हैं। लड़कियों को 9वीं कक्षा से साइकिल खरीदने के लिए 3 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही बेटियों की शिक्षा के लिए प्रत्येक पंचायत में 10+2 उच्च विद्यालयों का निर्माण कराया गया है, ताकि बेटियां अपने घर से नजदीक पढ़ाई कर सकें। मैट्रिक पास करने पर उन्हें 10 हजार रुपए, इंटर की परीक्षा पास करने पर 25 हजार रुपए और स्नातक पास बेटियों को आगे की पढ़ाई के लिए 50 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। इस प्रकार से राज्य में बेटियों के जन्म से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई पूरी होने तक कुल 94,100 रुपए दिए जा रहे हैं। इन सभी योजनाओं के कारण बेटियों की शिक्षा स्तर में व्यापक बदलाव आया है और उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। 

जननी बाल सुरक्षा योजना की शुरुआत

वर्ष 2005 से पूर्व महिलाओं को प्रसव के दौरान सरकार के स्तर पर कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाती थी। हमलोगों ने जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली राशि को डी०बी०टी० के माध्यम से प्रसव के 48 घंटे के अंदर सीधे उनके खाते में भेजना शुरू कर दिया। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए 1,400 रुपए तथा शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1,000 रुपए दिए जाते हैं। इससे एक ओर जहां राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर मातृ-शिशु मृत्यु दर में भी लगातार कमी आ रही है। वर्ष 2005 में शिशु मृत्यु दर जहां प्रति एक हजार पर 61 थी, वहीं अब घटकर मात्र 27 हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर है। वहीं मातृ मृत्यु दर जहां वर्ष 2004-06 में प्रति लाख 312 थी, जो अब घटकर मात्र 118 हो गई है। टीकाकरण का आच्छादन 18 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से भी अधिक हो चुका है। 

 जीविका दीदियां बनी आत्मनिर्भर 

राज्य में पहले स्वयं सहायता समूह की संख्या नहीं के बराबर थी। वर्ष 2006 में हमलोगों ने विश्व बैंक से ऋण लेकर स्वयं सहायता समूह का गठन किया, जिसे जीविका नाम दिया गया। राज्य में स्वयं सहायता समूहों की संख्या लगभग 11 लाख हो गई है, जिससे जुड़कर अब तक 1 करोड़ 40 लाख जीविका दीदियां आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। आज बिहार में जीविका दीदियों द्वारा अनेक काम जैसे जैविक खेती, कृषि विपणन व्यवसाय, मछली पालन, मधुमक्खी पालन एवं उद्यमिता विकास से जुड़े काम कराए जा रहे हैं। इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ रही है तथा वे अपने परिवार का अच्छे से ध्यान रख रही हैं। राज्य के सभी अस्पतालों में मरीजों एवं उनके परिजनों तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति आवासीय विद्यालयों में दीदी की रसोई चलाई जा रही है। दीदी की रसोई में लोगों को सस्ती दर पर अच्छा खाना मिल रहा है, जिसकी देश भर में सराहना हो रही है। अब दीदी की रसोई का विस्तार राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों एवं सरकारी अस्पतालों में किया जा रहा है। 

महिलाओं को अपने उद्यम के लिए दी जा रही 10 लाख रुपए तक की राशि 

अब राज्य के शहरी क्षेत्रों में भी स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा रहा है तथा इनकी संख्या 36 हजार से अधिक हो गई है। राज्य के शहरी क्षेत्रों में अब तक 3 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं जीविका से जुड़ कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। इसके साथ ही, महिला उद्यमी योजना के तहत महिलाओं को अपना उद्यम करने के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता राशि दी जा रही है।  

 मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की हुई शुरुआत 

हमलोगों ने हाल ही में राज्य में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की है। इसके तहत राज्य के सभी परिवारों की एक महिला को अपनी पसंद का रोजगार शुरू करने के लिए 10 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। मुझे बहुत खुशी है कि महज डेढ़ महीने के अंदर 1 करोड़ 41 लाख महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपए डी०बी०टी० के माध्यम से भेज दिए गए हैं। ये राशि महिलाओं को अपनी पसंद का रोजगार करने के लिए दिए गए हैं, यह राशि उनसे कभी भी वापस नहीं ली जाएगी। साथ ही इस राशि से जो महिलाएं अच्छा रोजगार करेंगी उन्हें आगे 2 लाख रूपए की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। ये सब काम हमलोग महिलाओं के उत्थान और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कर रहे हैं। 

 महिलाओं की मांग पर बंद हुई शराबबंदी 

आप सबको पता है कि सामाजिक कुरीतियों व कुप्रथाओं से महिलाएं ज्यादा प्रभावित होती हैं। इसे लेकर हमलोगों ने समाज सुधार अभियान के तहत राज्य में शराबबंदी के साथ-साथ बाल विवाह एवं दहेज प्रथा को समाप्त करने पर जोर दिया। राज्य में महिलाओं की मांग पर ही शराबबंदी लागू की गई है। समाज में इसका बहुत अच्छा असर है तथा सभी जगह शांति का माहौल है। राज्य के चतुर्मुखी विकास से महिलाओं को काफी फायदा हुआ है। इस प्रकार से महिलाओं की तरक्की एवं उन्हें आत्मनिर्भर तथा सशक्त बनाने के लिए हमलोगों ने जो काम किए हैं, उसे आपलोग याद रखिएगा। आगे भी हमलोग ऐसे ही राज्य की महिलाओं के उत्थान के लिए काम करेंगे। हमलोग जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं।