रोल नंबर की छोटी-सी भूल पर गरमाईं गुरूजी, मासूम पर बरसाई दनादन छड़ियां, तीसरी की छात्रा की पिटाई से मचा बवाल, अब शिक्षक पर लटकी निलंबन की तलवार

Bihar School News: तीसरी कक्षा की छात्रा साक्षी कुमारी के साथ हुई बेरहम पिटाई ने शिक्षा महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

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रोल नंबर की छोटी-सी भूल पर गरमाईं गुरूजी- फोटो : reporter

Bihar School News: पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अथमलगोला प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सूर्यपुरा में तीसरी कक्षा की छात्रा साक्षी कुमारी के साथ कथित तौर पर हुई बेरहम पिटाई ने शिक्षा महकमे में हड़कंप मचा दिया है। आरोप है कि एक मामूली गलती पर शिक्षक ने मासूम छात्रा पर इस कदर छड़ियां बरसाईं कि उसके शरीर पर चोट के निशान उभर आए। मामले ने तूल पकड़ा तो प्रशासन भी हरकत में आ गया।

परिजनों के मुताबिक, साक्षी कुमारी पहले से ही बीमार थी। इसके बावजूद वह परीक्षा देने विद्यालय पहुंची थी। आरोप है कि परीक्षा के दौरान छात्रा से रोल नंबर बताने में गलती हो गई। इसी बात पर शिक्षक मनीष कुमार का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने कथित तौर पर छात्रा को 5 से 6 छड़ियां मार दीं। परिवार का दावा है कि पिटाई इतनी बेरहमी से की गई कि बच्ची के शरीर पर दाग और चोट के निशान पड़ गए।

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घर पहुंचने के बाद साक्षी ने रोते हुए पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद मामला तेजी से फैल गया और ग्रामीणों में भी आक्रोश देखने को मिला। शिकायत मिलते ही प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी दीवा श्री और प्रखंड विकास पदाधिकारी मौके पर छात्रा के घर पहुंचे। अधिकारियों ने बच्ची की स्थिति का जायजा लिया और उसके बाद विद्यालय पहुंचकर संबंधित शिक्षक से भी पूछताछ की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए बाढ़ की एसडीएम गरिमा लोहिया ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने संबंधित शिक्षक के निलंबन की अनुशंसा करते हुए जिला शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी दीवा श्री ने बताया कि छात्रा की हालत फिलहाल सामान्य है, लेकिन प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रतीत होने पर एसडीएम के निर्देशानुसार शिक्षक मनीष कुमार के निलंबन के लिए जिला कार्यालय को पत्र भेजा जाएगा।

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वहीं, आरोपों पर शिक्षक मनीष कुमार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने छात्रा की बेरहमी से पिटाई नहीं की। उनका कहना है कि रोल नंबर गलत बताने पर उन्होंने केवल दो छड़ी लगाई थी। यानी छात्रा के परिजनों और शिक्षक के दावों में स्पष्ट अंतर सामने आया है, जिसकी जांच अब शिक्षा विभाग करेगा।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब स्कूलों में शारीरिक दंड पर पूरी तरह प्रतिबंध है। बच्चों के साथ मारपीट न केवल शिक्षा के अधिकार और बाल संरक्षण के नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में भी आता है। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग की जांच पर टिकी हैं कि आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

रिपोर्ट- रविशंकर