Bihar Education News: 5वीं के बच्चे नहीं पढ़ पा रहे दूसरी कक्षा की किताब, अब शिक्षा विभाग ने बनाया नया मास्टर प्लान, बिहार के सरकारी स्कूलों में नया मॉडल लागू

Bihar Education News: बिहार के सरकारी स्कूलों में इस बार गर्मी की छुट्टियां सिर्फ आराम और मस्ती तक सीमित नहीं रहेंगी। ...

New Education Model in Bihar Schools to Improve Basic Readin
बिहार के सरकारी स्कूलों में नया मॉडल लागू- फोटो : X

Bihar Education News: बिहार के सरकारी स्कूलों में इस बार गर्मी की छुट्टियां सिर्फ आराम और मस्ती तक सीमित नहीं रहेंगी। अब बच्चों की तालीम छुट्टियों में भी जारी रहेगी। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने पहली से आठवीं कक्षा तक के करीब 1.70 करोड़ छात्रों के लिए खास गतिविधि आधारित होमवर्क तैयार किया है। इस नई व्यवस्था को ‘वर्क फ्रॉम होम’ मॉडल की तर्ज पर लागू किया जा रहा है, ताकि बच्चे घर बैठे भी अपनी पढ़ाई से जुड़े रहें।

शिक्षा विभाग का कहना है कि छुट्टियों के दौरान छात्र हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों की पढ़ाई घर पर करेंगे। सबसे खास बात यह है कि यह होमवर्क रटने वाली पुरानी पद्धति पर आधारित नहीं होगा, बल्कि पूरी तरह प्रैक्टिकल और एक्टिविटी बेस्ड होगा। बच्चों को खेतों की जुताई, बुआई और कटाई की प्रक्रिया समझनी होगी, किसानों का इंटरव्यू लेना होगा और उस पर रिपोर्ट तैयार करनी होगी।

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इसके अलावा रसोईघर के विज्ञान को समझाने के लिए बच्चों को अपनी मां, दादी या नानी से दूध से दही बनने और तिल से तेल निकालने की प्रक्रिया जाननी होगी। जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसे गणितीय सवालों का इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर कराया जाएगा। वहीं हिंदी और अंग्रेजी के शब्दों के सही उच्चारण का अभ्यास भी कराया जाएगा। बीपीएससी के जरिए शिक्षकों की नियुक्ति होने के बावजूद कई सर्वे में यह सामने आया है कि पांचवीं कक्षा के कुछ छात्र दूसरी कक्षा का पाठ भी सही ढंग से नहीं पढ़ पाते। कई बच्चे तीन अंकों का भाग देने में भी कमजोर पाए गए हैं। यही वजह है कि शिक्षा विभाग अब पढ़ाई के तरीके में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में जुट गया है।

प्रदेश में लगभग 78 हजार सरकारी स्कूल और करीब 5.80 लाख शिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन छात्रों की औसत उपस्थिति अभी भी लगभग 50 प्रतिशत ही रहती है। ऐसे में विभाग का मानना है कि छुट्टियों में दिया जाने वाला यह होमवर्क बच्चों की सीखने की क्षमता को बेहतर बनाएगा। छात्रों को पढ़ाई में आने वाली मुश्किलों को दूर करने के लिए शिक्षक और टोला सेवक स्थानीय स्तर पर मुस्तैद रहेंगे। बच्चे जरूरत पड़ने पर शिक्षकों से सीधे फोन पर संपर्क कर सकेंगे। शिक्षक ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिए कठिन विषयों को समझाएंगे और सवालों के जवाब देंगे।

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राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के सचिव ने कहा कि बिहार के ज्यादातर शिक्षक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इस नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।जुलाई में स्कूल खुलने के बाद सभी छात्रों के होमवर्क की जांच होगी। किस छात्र ने कितना काम किया, कितने जवाब सही या गलत रहे । इसका पूरा रिकॉर्ड स्कूल से लेकर जिला और राज्य मुख्यालय तक तैयार किया जाएगा। इसी सेंट्रलाइज्ड डेटा के आधार पर शिक्षा विभाग बच्चों के लर्निंग लेवल का आकलन करेगा और भविष्य की नई शैक्षणिक रणनीति तय करेगा।