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Sex Education: सेक्स की जानकारी के लिए गूगल बना गुरु,घर रहा खामोश, IIT रिपोर्ट में खुलासा, किशोरों तक नहीं पहुंची सही सेक्स एजुकेशन

Sex Education: देश में सेक्स एजुकेशन को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने समाज और शिक्षा व्यवस्था दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ..

Google Becomes Sex Tutor as Teens
सेक्स की जानकारी के लिए गूगल बना गुरु- फोटो : X

Sex Education: देश में सेक्स एजुकेशन को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने समाज और शिक्षा व्यवस्था दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आईआईटी के सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ एंड वेलबीइंग्स की एक ताज़ा स्टडी में खुलासा हुआ है कि किशोरों को सही और संतुलित जानकारी देने में परिवार और संस्थान दोनों पीछे छूट रहे हैं, जबकि इंटरनेट उनकी पहली “मदरसा-ए-इल्म” बन चुका है।

रिपोर्ट के मुताबिक, महज 7 फीसदी किशोरों को ही घर से सेक्स एजुकेशन की बुनियादी जानकारी मिली, जबकि 51 फीसदी छात्रों ने माना कि उन्हें पहली बार इसकी जानकारी गूगल या इंटरनेट के जरिए हासिल हुई। यह आंकड़ा इस बात की तस्दीक करता है कि डिजिटल दौर में जानकारी की पहुंच तो आसान हुई है, लेकिन उसकी सटीकता और मार्गदर्शन पर बड़ा सवाल खड़ा है।

हैरानी की बात यह भी है कि 49 फीसदी छात्र महज 15 साल की उम्र में ही सेक्स को समझने लगते हैं। वहीं, उम्र के हिसाब से देखें तो 10–12 साल के 6.5 फीसदी, 13-15 साल के 42.7 फीसदी, और 16-18 साल के 27.1 फीसदी किशोरों को इस विषय की जानकारी मिल चुकी होती है। इसके बावजूद 21.2 फीसदी किशोरियों ने स्वीकार किया कि उन्हें कभी भी किसी प्रकार की सेक्स एजुकेशन नहीं मिली। इस अध्ययन में कुल 1404 छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया, जिनसे उनकी मानसिक स्थिति, व्यवहार और स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल किए गए। नतीजे साफ तौर पर यह बताते हैं कि जानकारी की कमी और सही मार्गदर्शन का अभाव, जेंडर उत्पीड़न और छेड़छाड़ जैसी समस्याओं को बढ़ावा दे सकता है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 80 फीसदी छात्र सेक्स एजुकेशन को अकादमिक करिकुलम का हिस्सा बनाने के पक्ष में हैं। वहीं, 7.2 फीसदी ने इसका विरोध किया, जबकि 12.6 फीसदी अब भी इस मुद्दे पर असमंजस में हैं।

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जानकारी के स्रोतों पर नजर डालें तो 49 फीसदी छात्रों को स्कूल या कॉलेज के क्लासरूम से यह ज्ञान मिला, जबकि 6.7 फीसदी को अभिभावकों और सिर्फ 3.3 फीसदी को हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स से जानकारी मिली। यह रिपोर्ट एक अहम पैगाम देती है अगर समाज और तालीमी इदारों ने अब भी खामोशी ओढ़े रखी, तो अधूरी और भ्रामक जानकारी आने वाली नस्लों को गुमराह कर सकती है। अब वक्त है कि इस जरूरी मुद्दे पर खुलकर बात की जाए और सही इल्म को सही तरीके से पहुंचाया जाए।