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Kamada Ekadashi: कामदा एकादशी आज- काम, क्रोध और लोभ के पाप से मुक्ति का पुण्य पर्व, श्रीहरि संग महादेव की आराधना से पूर्ण होंगी मनोकामनाएं

Kamada Ekadashi: सावन मास में पड़ रही इस एकादशी पर मृगशिरा नक्षत्र, हर्षण योग तथा द्विपुष्कर योग का शुभ संयोग बन रहा है। ...

Kamada Ekadashi 2026 Worship Vishnu  Shiva for Divine Blessi
कामदा एकादशी आज- फोटो : social Media

Kamada Ekadashi: कामदा एकादशी का पावन व्रत आज रविवार को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ रखा जाएगा। सावन मास में पड़ रही इस एकादशी पर मृगशिरा नक्षत्र, हर्षण योग तथा द्विपुष्कर योग का शुभ संयोग बन रहा है। वहीं एकादशी तिथि पर शिववास का संयोग होने से आज भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की आराधना का भी विशेष विधान माना गया है। भक्त उपवास रखकर श्रीहरि का पूजन करेंगे और महादेव का अभिषेक कर पुण्यार्जन करेंगे।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कामदा एकादशी का व्रत कामभावना से उत्पन्न पापों के शमन का मार्ग प्रशस्त करता है। शास्त्रों में काम, क्रोध और लोभ को समस्त पापों का मूल माना गया है। मनुष्य अज्ञान अथवा असावधानीवश इन विकारों के वशीभूत होकर अनुचित कर्म कर बैठता है। ऐसे पापों से निवृत्ति और आत्मशुद्धि के लिए कामदा एकादशी का व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है।

श्रद्धापूर्वक व्रत, संयम और सात्विक आचरण करने से भगवान श्रीहरि प्रसन्न होते हैं। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ, सत्यनारायण पूजा, श्रीमद्भागवत श्रवण, भजन-कीर्तन और मंत्र-जप का विशेष महत्व है। व्रत का पारण सोमवार, 10 अगस्त को प्रातः 05:29 बजे के बाद दूब से किया जाएगा। विष्णु पुराण की मान्यताओं के अनुसार कामदा एकादशी का व्रत श्रद्धापूर्वक करने से मनुष्य को सांसारिक जीवन में सुख-समृद्धि तथा मृत्यु के उपरांत उत्तम लोक की प्राप्ति होती है। वर्ष की 24 एकादशियों का विधिपूर्वक पालन आत्मसंयम और धर्माचरण को दृढ़ करने वाला माना गया है।

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार भोगीपुर में नागराज पुण्डरीक का शासन था। उनके दरबार में ललित नामक गंधर्व गायन करता था। पत्नी ललिता के स्मरण से उसका स्वर और ताल बिगड़ गया। क्रोधित होकर नागराज ने उसे राक्षस होने का श्राप दे दिया। पति की दुर्दशा से व्यथित ललिता की भेंट ऋष्यमूक ऋषि से हुई। ऋषि के निर्देश पर उसने एकादशी व्रत किया और उसका पुण्य पति को अर्पित कर दिया। व्रत के प्रभाव से ललित पुनः गंधर्व रूप में लौट आया और दोनों को उत्तम लोक की प्राप्ति हुई।कामदा एकादशी का संदेश स्पष्ट है इंद्रिय-संयम, सत्य, सात्विकता और श्रीहरि की भक्ति से जीवन के विकारों का क्षय होता है तथा आत्मा धर्म के प्रकाश की ओर अग्रसर होती है।

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