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हरियाली तीज पर शिव-पार्वती की आराधना, चार शुभ योगों में सुहागिनों का व्रत, मिथिला में मधुश्रावणी की भी पूर्णाहुति होगी आज

Hariyali Teej: सावन शुक्ल तृतीया के पावन मौके पर आज शनिवार को हरियाली तीज का व्रत श्रद्धा, आस्था और उमंग के साथ मनाया जाएगा।

Hariyali Teej
हरियाली तीज- फोटो : social Media

Hariyali Teej: सावन शुक्ल तृतीया के पावन मौके पर आज शनिवार को हरियाली तीज का व्रत श्रद्धा, आस्था और उमंग के साथ मनाया जाएगा। सनातन परंपरा में यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है। इसे कजरी तीज के नाम से भी जाना जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से निर्जला या फलाहार व्रत रखकर भोलेनाथ और माता पार्वती की आराधना करेंगी।

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सावन शुक्ल तृतीया पर सुबह 6:30 बजे तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा और इसके बाद पूरे दिन उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। इस दौरान शिव योग, सिद्ध योग, रवियोग और जयद् योग का शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं में इन योगों को मंगलकारी और शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है। ऐसे में हरियाली तीज की पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है।

हरियाली तीज महिलाओं के लिए सिर्फ व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, स्नेह और वैवाहिक जीवन की खुशहाली से जुड़ी एक पुरानी रवायत है। महिलाएं सोलह श्रृंगार कर, मेहंदी रचाकर और झूले का आनंद लेते हुए पर्व की खुशियां साझा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करने से अखंड सौभाग्य, सुख, समृद्धि, शांति और वैभव की कामना पूरी होती है।

इस दिन पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली के लिए भगवान शिव का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। दुर्गा के 108 नामों का पाठ भी शुभ माना गया है। परिवार की उन्नति और संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले श्रद्धालु महादेव को बेलपत्र अर्पित करेंगे और दुर्गा सप्तशती के 11वें अध्याय का पाठ करेंगे।

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वहीं कुंवारी युवतियां मनचाहा जीवनसाथी पाने की मुराद से हरियाली तीज का व्रत रखकर उमा-महेश्वर की पूजा-अर्चना करेंगी। मान्यता है कि माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था, इसलिए अविवाहित युवतियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं।

मिथिला समाज में भी आज का दिन खास है। पिछले 13 दिनों से चल रहे मधुश्रावणी पर्व का समापन 15 अगस्त को होगा। इस दौरान नवविवाहिताओं से जुड़ी परंपराएं और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। समापन के दिन टेमी दागने की रस्म निभाई जाएगी और नवविवाहिताएं सुहागिन महिलाओं को सिंदूर का मंगल टीका लगाकर उनका आशीर्वाद लेंगी।हरियाली तीज और मधुश्रावणी, दोनों पर्व भारतीय संस्कृति में नारी आस्था, दांपत्य प्रेम और पारिवारिक मंगलकामना की गहरी रवायत को सामने रखते हैं। सावन की हरियाली, शिव-पार्वती की आराधना और सुहागिनों के मंगल गीतों के बीच आज बिहार में आस्था का रंग और भी गहरा नजर आएगा।