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Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर सिर्फ एक दिन खुलता है यह अनोखा मंदिर, भगवान को राखी बांधती हैं बहनें; जानें मान्यता

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर जानें उत्तराखंड के बंसी नारायण मंदिर की कहानी, जो मान्यता के अनुसार साल में सिर्फ एक दिन खुलता है। जानें मंदिर का इतिहास और पौराणिक कथा।

Raksha Bandhan 2026

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते के लिए खास माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वादा करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड में एक ऐसा मंदिर भी है, जिसके बारे में मान्यता है कि वह साल में सिर्फ एक दिन भक्तों के लिए खुलता है। यह दिन रक्षाबंधन यानी सावन पूर्णिमा का होता है।

यह मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले की उरगम घाटी में स्थित बंसी नारायण मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। मंदिर से जुड़ी कई पौराणिक मान्यताएं हैं और रक्षाबंधन के दिन यहां खास पूजा की जाती है।

रक्षाबंधन पर ही खुलता है बंसी नारायण मंदिर

बंसी नारायण मंदिर के बारे में स्थानीय मान्यता है कि यह मंदिर साल में केवल एक दिन, सावन की पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन खुलता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। मान्यता है कि भक्त भगवान को रक्षा सूत्र भी अर्पित करते हैं। मंदिर का यह खास संबंध रक्षाबंधन को और भी विशेष बना देता है।

हिमालय की खूबसूरत वादियों के बीच है मंदिर

बंसी नारायण मंदिर चमोली की उरगम घाटी में स्थित है। यह इलाका ऊंचे पहाड़ों, जंगलों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। मंदिर के आसपास हिमालय की पर्वत श्रृंखलाएं दिखाई देती हैं। यहां ओक और रोडोडेंड्रोन के जंगल भी देखने को मिलते हैं। पहाड़ों और हरियाली के बीच स्थित मंदिर का वातावरण श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रकृति पसंद करने वाले लोगों को भी आकर्षित करता है।

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भगवान विष्णु की मूर्ति है स्थापित

मंदिर का आकार बहुत बड़ा नहीं है। स्थानीय विवरणों के अनुसार मंदिर करीब 10 फीट ऊंचा है और यहां भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित है। मंदिर की बनावट और इसके आसपास का प्राकृतिक वातावरण इसे खास बनाता है। मंदिर के निर्माण को लेकर अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं। कुछ विवरण इसे करीब 8वीं सदी का बताते हैं, हालांकि इसके इतिहास से जुड़ी सभी बातों को लेकर एक जैसी जानकारी उपलब्ध नहीं है।

राजा बलि और भगवान विष्णु से जुड़ी है कहानी

बंसी नारायण मंदिर से जुड़ी कहानी हिंदू धर्म की प्रसिद्ध वामन अवतार कथा से जोड़ी जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, उस समय राजा बलि का बहुत प्रभाव था। देवताओं की मदद के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि से तीन कदम जमीन मांगी। राजा बलि ने भगवान वामन की मांग स्वीकार कर ली। इसके बाद भगवान विष्णु ने विशाल रूप धारण किया। उन्होंने दो कदम में धरती और आकाश को नाप लिया। तीसरे कदम के लिए जब जगह नहीं बची तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान ने अपना तीसरा कदम राजा बलि के सिर पर रखा और उन्हें पाताल लोक भेज दिया। भगवान विष्णु के इस रूप को त्रिविक्रम भी कहा जाता है।

माता लक्ष्मी ने राजा बलि को बांधी थी राखी

एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु राजा बलि को दिए वचन के कारण उनके साथ पाताल लोक चले गए थे। काफी समय तक भगवान विष्णु के वापस न लौटने पर माता लक्ष्मी चिंतित हुईं। कथा के अनुसार, नारद मुनि की सलाह पर माता लक्ष्मी सावन की पूर्णिमा के दिन राजा बलि के पास पहुंचीं। उन्होंने राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। इसके बाद राजा बलि ने भगवान विष्णु को पाताल लोक से जाने की अनुमति दी। इसी पौराणिक कथा के कारण रक्षाबंधन और भगवान विष्णु से जुड़े इस स्थान को लेकर खास मान्यता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि बंसी नारायण मंदिर का संबंध उसी कथा से है और यह वह स्थान है जहां भगवान नारायण पाताल लोक से वापस आए थे।

रक्षाबंधन पर क्यों खास हो जाता है मंदिर?

बंसी नारायण मंदिर की सबसे खास बात इसकी रक्षाबंधन से जुड़ी मान्यता है। साल में केवल एक दिन मंदिर के खुलने की परंपरा और भगवान विष्णु से जुड़ी पौराणिक कहानी इसे श्रद्धालुओं के लिए खास बनाती है। अगर आप उत्तराखंड घूमने की योजना बना रहे हैं और धार्मिक स्थलों के साथ पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता देखना चाहते हैं, तो उरगम घाटी का यह मंदिर एक अलग अनुभव दे सकता है। हालांकि, यात्रा से पहले मंदिर के खुलने और स्थानीय रास्तों की स्थिति की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।