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वरुण गांधी का राजनीतिक 'वनवास' खत्म? परिवार संग पीएम मोदी से की मुलाकात, कहा- 'आपमें पितृवत स्नेह का भाव है'

पूर्व भाजपा सांसद वरुण गांधी ने परिवार सहित पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जिसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

वरुण गांधी का राजनीतिक 'वनवास' खत्म? परिवार संग पीएम मोदी से

New Delhi - पूर्व भाजपा सांसद वरुण गांधी ने मंगलवार को अपनी पत्नी यामिनी रॉय चौधरी और बेटी अनुसूया के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात की। 2024 के लोकसभा चुनाव में पीलीभीत से टिकट कटने के बाद वरुण गांधी की पीएम मोदी से यह पहली औपचारिक भेंट है। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वरुण गांधी की भाजपा के मुख्य संगठन में फिर से वापसी होने वाली है।

'सच्चे अभिभावक हैं पीएम': वरुण गांधी

मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर साझा करते हुए वरुण गांधी ने प्रधानमंत्री के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, "परिवार सहित श्रद्धेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से मिलकर उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन पाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आपके आभामंडल में अद्भुत पितृवत स्नेह और संरक्षण का भाव है। आपसे हुई भेंट इस विश्वास को और भी दृढ़ बना देती है कि आप देश और देशवासियों के सच्चे अभिभावक हैं।"

सोशल मीडिया पर चर्चा और सियासी मायने

वरुण गांधी के इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कई राजनीतिक विश्लेषक इसे वरुण गांधी की 'घर वापसी' के संकेत के रूप में देख रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में वरुण गांधी अपनी ही सरकार की नीतियों पर मुखर रहे थे, जिसके कारण 2024 के चुनाव में उन्हें और उनकी मां मेनका गांधी को टिकट नहीं दिया गया था। अब पीएम की "पितृवत स्नेह" वाली तारीफ को उनकी नाराजगी खत्म होने और पार्टी में नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना से जोड़कर देखा जा रहा है।

नेहरू-गांधी परिवार से अलग बनाई पहचान

वरुण गांधी देश के सबसे प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार 'नेह़रू-गांधी' परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पोते और संजय-मेनका गांधी के पुत्र हैं। जहां उनके चचेरे भाई राहुल गांधी और बहन प्रियंका गांधी कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे हैं, वहीं वरुण और उनकी मां ने 2004 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामकर अलग राह चुनी थी। वे पार्टी के सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं।

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सक्रिय राजनीति में वापसी का इंतज़ार

वरुण गांधी तीन बार के लोकसभा सांसद (सुल्तानपुर और पीलीभीत) रहे हैं। 2024 में टिकट न मिलने के बाद कांग्रेस की ओर से उन्हें कई बार पार्टी में शामिल होने के निमंत्रण मिले, लेकिन वरुण ने मौन साधे रखा। मंगलवार की इस मुलाकात ने यह संकेत दे दिया है कि वरुण गांधी फिलहाल भाजपा के साथ ही अपनी अगली राजनीतिक पारी की योजना बना रहे हैं। अब देखना यह होगा कि पार्टी उन्हें संगठन में या आगामी विधानसभा चुनावों में क्या बड़ी जिम्मेदारी सौंपती है।