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आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, आदेशों को मजाक समझना गलत, विफलता पर हुआ नाराज

सुप्रीम कोर्ट ने पहले की सुनवाई में यह भी कहा था कि यदि आवारा कुत्तों के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होती है या कोई गंभीर रूप से घायल होता है, तो इसकी जिम्मेदारी केवल नगर निकायों की ही नहीं बल्कि डॉग फीडर्स की भी तय की जा सकती है।

Supreme Courts decision on stray dogs
Supreme Courts decision on stray dogs- फोटो : news4nation

देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और इससे जुड़ी सुरक्षा चिंताओं पर सुनवाई करते हुए भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं में मांग की गई थी कि अस्पतालों, स्कूलों, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद दोबारा उसी इलाके में न छोड़ा जाए।


मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस N. V. Anjaria की बेंच ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों से होने वाले नुकसान को केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं आंका जा सकता। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि 22 अगस्त और 7 नवंबर 2025 को जारी किए गए निर्देशों के बावजूद रिकॉर्ड में ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि आदेशों का प्रभावी तरीके से पालन जमीनी स्तर पर हुआ है। इस मामले में अंतिम सुनवाई 29 जनवरी को हुई थी, जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान राज्यों, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और Animal Welfare Board of India ने अपनी-अपनी दलीलें पेश की थीं।

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सुप्रीम कोर्ट ने पहले की सुनवाई में यह भी कहा था कि यदि आवारा कुत्तों के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होती है या कोई गंभीर रूप से घायल होता है, तो इसकी जिम्मेदारी केवल नगर निकायों की ही नहीं बल्कि डॉग फीडर्स की भी तय की जा सकती है। अदालत ने साफ कहा था कि उसकी टिप्पणियों को हल्के में लेना गलत होगा और स्थानीय प्रशासन की विफलता पर जिम्मेदारी तय करने से कोर्ट पीछे नहीं हटेगा।


यह मामला 28 जुलाई 2025 को तब शुरू हुआ था, जब सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा कुत्तों के हमलों और उनसे होने वाली मौतों पर स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद 11 अगस्त 2025 को अदालत ने दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को आठ सप्ताह के भीतर पकड़कर शेल्टर होम में भेजने का निर्देश दिया था।

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हालांकि, इस आदेश के खिलाफ विरोध दर्ज होने के बाद 22 अगस्त 2025 को कोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन किया। अदालत ने कहा था कि जो कुत्ते रेबीज से संक्रमित नहीं हैं और आक्रामक नहीं पाए जाते, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है जहां से उन्हें पकड़ा गया था।


बाद में इस मामले का दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया गया। 7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए राज्यों और एनएचएआई को हाईवे, अस्पताल, स्कूल और अन्य सार्वजनिक संस्थानों के आसपास से आवारा जानवरों को हटाने के निर्देश दिए थे।