LATEST NEWS

  • Chirag attack on Congress
  • Chirag attack on Congress: भागलपुर में चिराग पासवान का कांग्रेस और विपक्ष पर हमला, SIR और EVM को

  • shahrukh khan mannat
  • shahrukh khan mannat: शाहरुख के मन्नत से जुड़ा अनिल कपूर ने खोला खास राज, बताया कैसे पूरा हुआ

  • Sukesh Chandrashekhar case
  • Sukesh Chandrashekhar case: सुकेश चंद्रशेखर के 200 करोड़ की ठगी मामले में नोरा फतेही को समन, 2

  • winter riding mask
  • winter riding mask: सर्दियों में बाइक चलाते समय ठंडी हवा से बचाएगा विंटर राइडिंग मास्क, जानें कीमत और

  • Munger Railway
  • Munger Railway: मुंगेर के जमालपुर IRIMEE में दो दिवसीय तकनीकी संगोष्ठी शुरू, वंदे भारत ट्रेनसेट पर होगी चर्चा

ईरान संकट का साइड इफेक्ट: अब भारत में कंडोम की कीमतों में लग सकती है 'आग'

भारत की कंडोम इंडस्ट्री लगभग 8,000 करोड़ रुपये की है, जो सालाना 400 करोड़ से अधिक यूनिट्स का उत्पादन करती है। युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों में बाधा आई है, जिससे पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल की आवक घट गई है।

Now condom prices in India may shoot up
ईरान संकट का साइड इफेक्ट कंडोम की कीमतों में लग सकती है 'आग'- फोटो : news 4 nation

ईरान और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब सिर्फ ईंधन या वैश्विक राजनीति तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह आम आदमी की जेब और उनकी रोजमर्रा की जरूरतों पर भी भारी पड़ने लगा है। रिपोर्टों के अनुसार, पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन में आई भारी रुकावट के कारण भारत की कंडोम इंडस्ट्री संकट के दौर से गुजर रही है। कच्चे माल की कमी और बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत ने आने वाले दिनों में कंडोम की कीमतों में बड़े इजाफे के संकेत दे दिए हैं।

सप्लाई चेन पर संकट और 8000 करोड़ का बाजार

भारत की कंडोम इंडस्ट्री लगभग 8,000 करोड़ रुपये की है, जो सालाना 400 करोड़ से अधिक यूनिट्स का उत्पादन करती है। युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों में बाधा आई है, जिससे पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल की आवक घट गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सप्लाई चेन में यह गतिरोध बना रहा, तो मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ने से रिटेल मार्केट में उत्पादों की कीमतों में भारी वृद्धि होना तय है।

कच्चे माल और अमोनिया की कीमतों में भारी वृद्धि

कंडोम निर्माण में सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया का महत्वपूर्ण योगदान होता है। सिलिकॉन ऑयल लुब्रिकेंट के रूप में काम करता है, जबकि अमोनिया लेटेक्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अनिवार्य है। मौजूदा संकट के कारण अमोनिया की कीमतों में 40% से 50% तक की बढ़ोतरी होने की आशंका है। इसके अलावा, पैकेजिंग के लिए उपयोग होने वाले PVC और एल्युमिनियम फॉयल की लागत बढ़ने से कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

दिग्गज कंपनियों के सामने उत्पादन की चुनौती

HLL Lifecare, Mankind Pharma और Cupid जैसी इस सेक्टर की बड़ी कंपनियां वर्तमान में कच्चे माल की किल्लत से जूझ रही हैं। कंपनियों के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि माल की कमी और बढ़ती महंगाई के कारण उत्पादन के साथ-साथ समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसके अलावा, सरकार द्वारा पेट्रोकेमिकल संसाधनों को अन्य प्राथमिक क्षेत्रों की ओर मोड़ने की संभावना से इस इंडस्ट्री को मिलने वाली सप्लाई और भी कम हो सकती है।

NSIT
Nsmch

महंगाई का सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव

कंडोम की कीमतों में वृद्धि केवल आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक मुद्दा भी बन सकता है। भारत में परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण के लिए कंडोम एक महत्वपूर्ण साधन है। यदि इसकी कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती हैं, तो इसके इस्तेमाल में गिरावट आ सकती है। वैश्विक संकट का यह असर दिखाता है कि दूरदराज के युद्ध किस तरह एक सामान्य नागरिक की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और बजट को प्रभावित कर सकते हैं।