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भारत के सबसे बड़े फोटोग्राफर का निधन, एक कैमरे से दिखाई देश की सबसे बड़ी सच्चाइयां, देखिए फोटो जो दिल हिला देते हैं

भारत के हर रंग को अपने कैमरे के सहारे जीवंत करने वाले देश के सबसे मशहूर फोटोग्राफरों में शामिल रघु राय निधन के बाद अपनी कई तस्वीरों से जीवंत हो गए.

Raghu Rai
Raghu Rai- फोटो : news4nation

भारत के समाज में बसने वाली संवेदना, संघर्ष और सौंदर्य को दुनिया तक पहुंचाने वाले दिग्गज फोटोग्राफर रघु राय का निधन हो गया। 83 वर्षीय राय पिछले दो वर्षों से कैंसर से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही फोटोग्राफी जगत और कला प्रेमियों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। रघु राय सिर्फ एक फोटोग्राफर नहीं थे, बल्कि वे उन दुर्लभ कलाकारों में थे जिन्होंने अपने कैमरे के जरिए समय की धड़कन को महसूस किया और उसे तस्वीरों में जीवंत कर दिया। उनके फोटो-एस्से ने अपने दौर की सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक नब्ज़ को जिस गहराई से पकड़ा, वह उन्हें अपने समकालीनों से अलग बनाता है।

पाकिस्तान में जन्मस्थान 

18 दिसंबर 1942 को झांग (अब पाकिस्तान) में जन्मे रघु राय ने 1960 के दशक के मध्य में अपने करियर की शुरुआत की। जल्द ही वे द स्टेट्समैन से स्टाफ फोटोग्राफर के रूप में जुड़े और यहीं से उनकी पहचान बनने लगी। बाद में उन्होंने इंडिया टुडे के साथ भी काम किया और अपनी फोटोग्राफी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

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छह दशक का सफर 

छह दशकों से अधिक लंबे अपने करियर में रघु राय ने भारत के हर रंग को अपने कैमरे में कैद किया जिसमें राजनीति, दर्द, जिजीविषा और इंसानियत सब शामिल रही। उनकी तस्वीरें सिर्फ घटनाओं का दस्तावेज नहीं थीं, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत को देखने का एक नजरिया भी बन गईं।

कला जगत में मिसाल

उनका कैमरा शहरों की भागती सड़कों से लेकर गांवों की शांत जिंदगी तक हर पहलू को बराबर संवेदनशीलता के साथ दर्ज करता था। उन्होंने 1971 बांग्लादेश युद्ध और भोपाल गैस त्रासदी जैसी घटनाओं को दुनिया के सामने लाने में अहम भूमिका निभाई। वहीं, मदर टेरेसा और दलाई लामा जैसी हस्तियों के उनके करीबी पोर्ट्रेट आज भी कला जगत में मिसाल माने जाते हैं।

भावनात्मक जुड़ाव

रघु राय की फोटोग्राफी की सबसे बड़ी खासियत उसका सहज और ‘रॉ’ अंदाज था। वे कृत्रिमता से दूर रहते हुए इंसानी भावनाओं को उनकी सबसे सच्ची अवस्था में कैद करते थे। यही वजह है कि उनकी तस्वीरें देखने वाले के भीतर सीधा उतर जाती हैं और एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव पैदा करती हैं।

हर दृश्य एक कहानी

अपने काम को लेकर वे कहते थे, “मैं कभी सिर्फ असाइनमेंट वाला फोटोग्राफर नहीं रहा। मुझे जहां भी भेजा जाता, मैं पूरी यात्रा को कैमरे में कैद करता—चाहे वह ट्रेन हो, विमान हो, टैक्सी हो या बैलगाड़ी। मेरे लिए हर चेहरा, हर दृश्य एक कहानी था।” रघु राय का काम केवल फोटोग्राफी नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का एक जीवंत दस्तावेज है। उनके जाने से कला और पत्रकारिता की दुनिया ने एक ऐसा नजरिया खो दिया है, जिसने देश को देखने और समझने का तरीका बदल दिया था।