NEET धांधली का बड़ा खेल बेनकाब, स्कॉलर बैठाने से फर्जी बायोमेट्रिक तक, इतने लाख में बिकती थी मेडिकल सीट की सेटिंग

NEET Scam: बिहार में NEET UG 2026 धांधली की जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU को बड़ी कामयाबी मिली है। ...

NEET UG 2026 Scam EOU Arrests Three Key Accused in Bihar
NEET धांधली का बड़ा खेल बेनकाब- फोटो : social Media

NEET Scam: बिहार में NEET UG 2026 धांधली की जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU को बड़ी कामयाबी मिली है। लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों पर कथित धांधली के मामले में एजेंसी ने गिरोह के मुख्य सरगना डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट, उसके भाई अश्विनी कुमार और NEET से जुड़े एक अन्य आरोपी डॉ. उज्ज्वल राज को गिरफ्तार किया है। तीनों की गिरफ्तारी पटना के जक्कनपुर स्थित आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय परीक्षा केंद्र के बाहर से हुई, जहां वे एमबीबीएस की पूरक परीक्षा में शामिल होने पहुंचे थे।

जांच में सामने आया कि गिरोह सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रतियोगी और मेडिकल परीक्षाओं में ‘स्कॉलर’ बैठाने का पूरा नेटवर्क चला रहा था। आरोप है कि अभ्यर्थियों से 12 लाख से लेकर 30 लाख रुपये तक वसूले जाते थे। फॉर्म भरने के समय ही मूल अभ्यर्थी और उसके स्थान पर परीक्षा देने वाले स्कॉलर के बीच कथित सेटिंग कर दी जाती थी।

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मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू बायोमेट्रिक सत्यापन को कथित तौर पर चकमा देने का तरीका है। EOU के मुताबिक गिरोह ने कुछ अधिकृत आधार एजेंटों और कॉमन सर्विस सेंटर संचालकों की मदद से मूल अभ्यर्थी के बायोमेट्रिक की जगह फर्जी परीक्षार्थी का बायोमेट्रिक अपडेट कराया। फोटो मिक्सिंग के जरिए भी सत्यापन प्रक्रिया को बाईपास करने की कोशिश की जाती थी। जांच में लखीसराय, हाजीपुर, नवादा और नालंदा समेत कई जिलों के बायोमेट्रिक वेंडर्स की कथित संलिप्तता सामने आई है।

EOU के अनुसार रविशंकर की पत्नी मधुप्रिया भी परीक्षा की अभ्यर्थी थी। आरोप है कि उसके लिए फर्जी जाति प्रमाण पत्र तैयार कराया गया। जांच के दौरान गिरोह द्वारा अभ्यर्थियों की काउंसलिंग और एडमिशन में मदद के लिए कथित तौर पर फर्जी आय, जाति और दिव्यांगता प्रमाण पत्र तैयार कराने के सबूत भी मिले हैं।

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रविशंकर की निशानदेही पर उसके भाई अश्विनी कुमार के पटना स्थित रामकृष्णा नगर के दो ठिकानों पर छापेमारी की गई। यहां से बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए। EOU को कई परीक्षाओं से जुड़े एडमिट कार्ड, स्कूल के अंकपत्र, मूल प्रमाण पत्र और टीसी मिले। आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय की एमबीबीएस परीक्षा की कई खाली बुकलेट भी बरामद होने की बात कही गई है।

छापेमारी में SBI समेत विभिन्न बैंकों के 25 हस्ताक्षरित और ब्लैंक चेक भी मिले, जिन पर बड़ी रकम दर्ज थी। इसके अलावा दो लाख रुपये नकद बरामद किए गए। लखीसराय में कथित तौर पर स्कॉलर के आवागमन में इस्तेमाल होने वाली अश्विनी के नाम पर पंजीकृत टाटा हैरियर भी जब्त की गई है।

डॉ. उज्ज्वल राज पर इससे पहले भी परीक्षा धांधली के गंभीर आरोप लग चुके हैं। आरोप है कि NEET UG 2024 के दौरान कटिहार के कोढ़ा थाना क्षेत्र में जवाहर नवोदय विद्यालय केंद्र पर सात फर्जी स्कॉलर बैठाए गए थे। पूर्णिया के एक मामले में भी CBI उससे पूछताछ कर चुकी है। तीन मई 2026 की NEET में अनियमितताओं के मामले में भी उसकी गिरफ्तारी हो चुकी है।

EOU की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कथित नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं। मेडिकल, नर्सिंग और डेंटल कॉलेजों के छात्रों से लेकर बायोमेट्रिक मैनपावर सप्लायर, वेंडर और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों तक कई संदिग्धों की पहचान की गई है। जिन अभ्यर्थियों से जुड़े दस्तावेज, एडमिट कार्ड, प्रमाण पत्र और ब्लैंक चेक बरामद हुए हैं, उन्हें नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है।

यानी मामला सिर्फ NEET की कथित धांधली तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि जांच एजेंसी को मेडिकल और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी ‘सेटिंग’ के संकेत मिले हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस कथित परीक्षा माफिया का नेटवर्क कितनी दूर तक फैला है और इसके पीछे कौन-कौन से चेहरे अभी जांच के रडार पर हैं।