LATEST NEWS

  • कोसी नदी के जलस्तर में उफान: बराज से डिस्चार्ज 2.29 लाख क्यूसेक पार, तटीय इलाकों में अलर्ट
  • कोसी नदी के जलस्तर में उफान: बराज से डिस्चार्ज 2.29 लाख क्यूसेक पार, तटीय इलाकों में अलर्ट

  • Bihar News : भोजपुर में युवक को गोली मारे जाने पर परिजनों का फूटा गुस्सा, सड़क जाम कर की आरोपी की गिरफ्तारी की मांग
  • Bihar News : भोजपुर में युवक को गोली मारे जाने पर परिजनों का फूटा गुस्सा, सड़क जाम कर

  • बगहा में बेखौफ अपराधियों का तांडव: उप मुखिया और वार्ड पार्षद को मारी गोली, गंभीर हालत मे बेतिया GMCH रेफर
  • बगहा में बेखौफ अपराधियों का तांडव: उप मुखिया और वार्ड पार्षद को मारी गोली, गंभीर हालत मे बेतिया

  • पटना के मिलर ग्राउंड में ‘कृष्णोत्सव 2026’ का भव्य आगाज, सीएम सम्राट चौधरी ने किया उद्घाटन
  • पटना के मिलर ग्राउंड में ‘कृष्णोत्सव 2026’ का भव्य आगाज, सीएम सम्राट चौधरी ने किया उद्घाटन

  • Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने 32 साल पुराने हत्या के मामले में दिया बड़ा फैसला, सबूतों के अभाव में आरोपी को किया बरी, उम्रकैद की सजा किया रद्द
  • Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने 32 साल पुराने हत्या के मामले में दिया बड़ा फैसला, सबूतों के

कटिहार में बड़ा राजस्व घोटाला , बर्खास्त कर्मी के डोंगल से दो दिन में 39 दाखिल-खारिज, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

Bihar Crime: राजस्व विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है।....

Katihar Land Records Row 39 Mutations After Staff Dismissal
कटिहार में बड़ा राजस्व घोटाला- फोटो : reporter

Bihar Crime: कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड में राजस्व विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि राजस्व कर्मचारी मनोहर कुमार को 28 जुलाई को बर्खास्त किए जाने के बावजूद उनके डोंगल (डिजिटल लॉगिन डिवाइस) से 29 और 30 जुलाई को कुल 39 दाखिल-खारिज के मामले जनरेट किए गए। इस खुलासे के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि जब संबंधित राजस्व कर्मचारी को 28 जुलाई को ही सेवा से हटा दिया गया था, तो उसके बाद उनके नाम और डोंगल का इस्तेमाल कैसे होता रहा। आरोप है कि बर्खास्तगी के बाद भी दो दिनों तक लगातार दाखिल-खारिज की प्रक्रिया चलती रही, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

Diarch GO

मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी बर्खास्त कर्मचारी की डिजिटल पहचान सक्रिय रही, तो यह केवल तकनीकी लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक चूक या संभावित अनियमितता का मामला भी हो सकता है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि संबंधित लॉगिन का इस्तेमाल किसने किया और किन परिस्थितियों में दाखिल-खारिज के मामलों को स्वीकृत किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण की जांच कराने और तथ्य सामने आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि बर्खास्तगी के बाद डोंगल निष्क्रिय क्यों नहीं किया गया, किसने उसका उपयोग किया और इन 39 दाखिल-खारिज मामलों की वैधता क्या है।

NSIT
Nsmch

फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह राजस्व विभाग की डिजिटल व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है, साथ ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है।

रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह