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बिहार के सीओ का खुला खेल फर्रुखाबादी, दो कुर्सियों का खेल या दस्तावेजों की धांधली? इशुआपुर के सीओ शैलेंद्र कुमार पर गंभीर सवाल, मंत्री से शिकायत के बाद जांच की आहट

Bihar CO allegations: बिहार के सारण जिले के इशुआपुर अंचल के सीओ शैलेंद्र कुमार एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। उन पर ऐसे आरोप लगे हैं, जिन्होंने राजस्व महकमे की कार्यशैली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ...

Bihar Saran CO Shailendra Kumar Faces Fresh Allegations Over
दो कुर्सियों का खेल या दस्तावेजों की धांधली? - फोटो : reporter

Bihar CO allegations: बिहार के सारण जिले के इशुआपुर अंचल के सीओ शैलेंद्र कुमार एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। उन पर ऐसे आरोप लगे हैं, जिन्होंने राजस्व महकमे की कार्यशैली और प्रशासनिक पारदर्शिता को ताक पर रख कर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि इशुआपुर में योगदान देने के बाद भी उन्होंने 14 जुलाई को दाउदनगर अंचल के सरकारी कार्यों का निपटारा किया, जबकि वहां नए अंचल अधिकारी पहले ही पदभार ग्रहण कर चुके थे। अब इस पूरे मामले की शिकायत विभागीय मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) तक पहुंच चुकी है और विभागीय जांच की चर्चा तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, शैलेंद्र कुमार यादव औरंगाबाद जिले के दाउदनगर प्रखंड सह अंचल कार्यालय में सीओ के पद पर कार्यरत थे। 10 जुलाई को उन्हें औपचारिक विदाई दी गई और उन्होंने सारण जिले के इशुआपुर अंचल में अपना प्रभार भी ग्रहण कर लिया। दूसरी ओर दाउदनगर में सतीश कुमार सिंह ने नए अंचल अधिकारी के रूप में पदभार संभाल लिया। इसके बाद वह अवकाश पर चले गए।

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यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ लिया। आरोप है कि 14 जुलाई को शैलेंद्र कुमार इशुआपुर के सीओ के रूप में कार्यरत थे, लेकिन उन्होंने दाउदनगर अंचल से जुड़े सरकारी कार्यों का भी निपटारा किया। सवाल यह उठ रहा है कि जब दाउदनगर में नए सीओ की नियुक्ति और पदभार ग्रहण हो चुका था, तब पूर्व सीओ किस अधिकार से वहां की सरकारी फाइलों पर कार्रवाई कर रहे थे? यह मामला अब प्रशासनिक नियमों और अधिकार क्षेत्र पर गंभीर बहस का विषय बन गया है।

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की शिकायत संबंधित विभाग के मंत्री से की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बिना वैधानिक अधिकार के दूसरे अंचल का कार्य करना सेवा नियमों का उल्लंघन है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि मामले की प्रारंभिक जानकारी ली जा रही है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक भी पहुंचाई गई है।

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इसी बीच शैलेंद्र कुमार का एक और कथित मामला सुर्खियों में आ गया है। आरोप है कि जिस भूमि का वर्ष 1954 से नियमित लगान जमा होता आ रहा है, उसी जमीन पर उन्होंने अतिक्रमण वाद दर्ज कर दिया। इस कार्रवाई के बाद संबंधित भू-स्वामियों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि दशकों पुराने राजस्व अभिलेख और नियमित लगान भुगतान के बावजूद अतिक्रमण का मामला दर्ज किया जाना प्रशासनिक लापरवाही या गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करता है।इन आरोपों ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष और स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकार भ्रष्टाचार और धांधली पर सख्ती की बात करती है, तब ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई भी दिखाई देनी चाहिए। 

अब सबकी निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सिर्फ प्रशासनिक अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजस्व व्यवस्था की जवाबदेही और सरकारी कामकाज की पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल बन सकता है। वहीं, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और संबंधित अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।