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Sugar Production: भारत में सबसे ज्यादा चीनी कौन बनाता है? महाराष्ट्र-UP समेत जानें पूरा आंकड़ा

Sugar Production: जानें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु में कितनी चीनी का उत्पादन होता है और कौन सा राज्य देश में सबसे ज्यादा चीनी बनाता है।

Sugar Production

Sugar Production: त्योहारों का मौसम नजदीक आते ही देश में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पिछले एक महीने में चीनी का खुदरा भाव करीब 48.18 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। यानी एक महीने में चीनी करीब 17 रुपये प्रति किलो महंगी हुई है।

बढ़ती कीमतों के बीच चीनी के उत्पादन पर भी नजर है। भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में शामिल है और देश का चीनी उद्योग लाखों किसानों तथा ग्रामीण श्रमिकों की आजीविका से जुड़ा है। ऐसे में यह जानना भी जरूरी है कि देश में सबसे ज्यादा चीनी का उत्पादन किन राज्यों में होता है।

2025-26 के चीनी सीजन में भारत का कुल चीनी उत्पादन करीब 30.6 मिलियन मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश लंबे समय से देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्यों में शामिल रहे हैं। इनके बाद कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु का स्थान आता है।

महाराष्ट्र सबसे आगे

चीनी उत्पादन के मामले में महाराष्ट्र इस समय देश में सबसे आगे है। 2025-26 सीजन में राज्य में करीब 9.92 मिलियन मीट्रिक टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। राज्य में बड़ी संख्या में चीनी मिलें गन्ने की पेराई करती हैं।

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महाराष्ट्र की जलवायु गन्ने की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है। यहां तापमान, नमी और पर्याप्त धूप जैसी परिस्थितियां गन्ने की अच्छी पैदावार में मदद करती हैं। इसके अलावा राज्य में सहकारी चीनी मिलों का मजबूत नेटवर्क है, जिसमें किसानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। पुणे, सतारा, सोलापुर, अहमदनगर और कोल्हापुर महाराष्ट्र के प्रमुख चीनी उत्पादन वाले इलाके हैं।

उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर

उत्तर प्रदेश को भारत का प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य माना जाता है और इसे अक्सर देश का 'चीनी का कटोरा' भी कहा जाता है। राज्य में करीब 8.92 मिलियन मीट्रिक टन चीनी उत्पादन का अनुमान है।

उत्तर प्रदेश में देश का सबसे बड़ा गन्ना खेती क्षेत्र है। गंगा-यमुना के उपजाऊ मैदान और सिंचाई की सुविधा गन्ने की खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध कराते हैं। महाराष्ट्र की तुलना में उत्तर प्रदेश में निजी चीनी मिलों की भूमिका काफी मजबूत है। मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर और गोरखपुर राज्य के प्रमुख चीनी उत्पादन वाले क्षेत्र हैं।

कर्नाटक तीसरे स्थान पर

कर्नाटक करीब 4.71 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन के साथ देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में तीसरे स्थान पर है। राज्य के उत्तरी हिस्सों में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है। बेलगावी और बागलकोट जैसे इलाके प्रमुख गन्ना उत्पादन केंद्र हैं। दक्षिणी कर्नाटक को कावेरी बेसिन से मिलने वाली पानी की सुविधा का फायदा मिलता है। कर्नाटक की कई चीनी मिलों ने चीनी उत्पादन के साथ इथेनॉल और बिजली उत्पादन को भी अपनाया है। इससे गन्ने से मिलने वाले उत्पादों और किसानों की आय के अवसर बढ़ते हैं।

गुजरात चौथे नंबर पर

गुजरात में करीब 1.1 मिलियन मीट्रिक टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। राज्य देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में चौथे स्थान पर है। दक्षिण गुजरात के मैदानी और तटीय इलाकों में गन्ने की खेती प्रमुख रूप से की जाती है। राज्य में सहकारी चीनी मिलों का नेटवर्क भी मजबूत है। ये संस्थाएं किसानों को मिलों से जोड़ने और गन्ने की प्रोसेसिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

तमिलनाडु भी टॉप-5 में

तमिलनाडु करीब 0.9 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन के साथ देश के पांच बड़े चीनी उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य की गर्म जलवायु के कारण कई इलाकों में लंबे समय तक गन्ने की खेती और पेराई का काम चलता है। कई किसान गन्ने की पैदावार बढ़ाने और पानी की बचत के लिए आधुनिक खेती तकनीक और ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे राज्य के चीनी उद्योग को मजबूती मिल रही है।

भारत के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य

मौजूदा अनुमान के अनुसार महाराष्ट्र करीब 9.92 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन के साथ पहले स्थान पर है। उत्तर प्रदेश 8.92 मिलियन मीट्रिक टन के साथ दूसरे और कर्नाटक 4.71 मिलियन मीट्रिक टन के साथ तीसरे स्थान पर है। गुजरात और तमिलनाडु क्रमशः करीब 1.1 मिलियन और 0.9 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन के साथ शीर्ष पांच में शामिल हैं। चीनी की कीमतों में तेजी के बीच इन राज्यों का उत्पादन देश की कुल चीनी उपलब्धता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। गन्ने की पैदावार, मौसम, मिलों की क्षमता और चीनी रिकवरी जैसे कई कारक हर सीजन में उत्पादन के आंकड़ों को प्रभावित कर सकते हैं।