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Onion Price: प्याज ने बिगाड़ा किचन बजट! 80 किलो तक भाव, अब सरकार देगी 35 में राहत

Onion Price: देश के कुछ बाजारों में प्याज का भाव 80 रुपये किलो तक पहुंच गया है। जानें प्याज महंगा होने की वजह, सरकार के कदम और कांदा एक्सप्रेस से कितनी राहत मिलेगी।

Onion Price

Onion Price: देश के कई हिस्सों में प्याज की कीमत बढ़ने से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। कुछ बाजारों में प्याज का खुदरा भाव 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबर है। हालांकि, यह पूरे देश का औसत भाव नहीं है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 28 अगस्त को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव करीब 37.87 रुपये प्रति किलो था।

कीमतों में तेजी को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्याज की सप्लाई बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में भेज रही है। इसके अलावा लोगों को कम कीमत पर प्याज उपलब्ध कराने और प्रमुख शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए रेलवे और सड़क के जरिए सप्लाई बढ़ाई जा रही है।

क्यों बढ़ रही है प्याज की कीमत?

प्याज के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। मौसमी मांग बढ़ने के साथ सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों का असर भी बाजार पर पड़ रहा है। त्योहारों और शादी के मौसम में प्याज की मांग बढ़ने से कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। महाराष्ट्र का नासिक देश के बड़े प्याज उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। यहां से देश के कई बड़े बाजारों में प्याज की सप्लाई होती है। कुछ इलाकों में फसल और सप्लाई से जुड़ी परिस्थितियों ने भी बाजार को प्रभावित किया है। हालांकि, सरकार का कहना है कि देश में प्याज की उपलब्धता को लेकर फिलहाल बड़ी चिंता की स्थिति नहीं है। 2025-26 में प्याज का उत्पादन करीब 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। यह पिछले साल के 307.67 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के लगभग बराबर है।

सरकार ने प्याज की कीमत रोकने के लिए क्या किया?

प्याज के बढ़ते दाम को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में भेजना शुरू किया है। सरकार के अनुसार 26 अगस्त से अलग-अलग जगहों पर बफर स्टॉक का प्याज पहुंचाया जा रहा है। इसके लिए रेलवे और सड़क परिवहन दोनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिन बड़े शहरों और इलाकों में प्याज की कीमत पर ज्यादा दबाव है, वहां अतिरिक्त सप्लाई भेजने पर जोर दिया जा रहा है।

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दिल्ली पहुंची कांदा एक्सप्रेस

दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्याज की सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार ने कांदा एक्सप्रेस शुरू की है। 28 अगस्त को नासिक से करीब 453.65 टन प्याज लेकर पहली ट्रेन दिल्ली पहुंची। इससे पहले सरकार दिल्ली में बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से बेचने की व्यवस्था भी कर चुकी है। NCCF और NAFED की मोबाइल वैन के साथ अलग-अलग बिक्री केंद्रों के जरिए लोगों को कम कीमत पर प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है।

35 रुपये किलो प्याज से कितनी राहत?

सरकारी केंद्रों पर 35 रुपये प्रति किलो की दर से मिलने वाला प्याज बाजार के मुकाबले काफी सस्ता है। इससे उन लोगों को राहत मिल रही है, जिन्हें खुले बाजार में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। हालांकि, 35 रुपये वाला सरकारी प्याज हर जगह उपलब्ध नहीं है। इसकी बिक्री चुनिंदा केंद्रों और मोबाइल वैन के जरिए की जा रही है। इसलिए सभी इलाकों के लोगों को इसका फायदा एक जैसा नहीं मिल पा रहा है।

सरकार के पास कितना प्याज है?

केंद्र सरकार का कहना है कि देश में घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त प्याज उपलब्ध है। सरकार ने 2026-27 के लिए बफर स्टॉक तैयार करने के लिए 2 लाख टन रबी प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था। 26 अगस्त तक सरकार करीब 1.21 लाख टन प्याज खरीद चुकी थी। सरकार मंडियों में प्याज की आवक, कीमत और उपलब्धता पर लगातार नजर रख रही है। जरूरत पड़ने पर बफर स्टॉक से और प्याज बाजार में भेजा जा सकता है।

क्या आगे प्याज के दाम कम होंगे?

सरकार की ओर से बाजार में प्याज की सप्लाई बढ़ाने के कदम उठाए जा रहे हैं। अगर बफर स्टॉक से सप्लाई लगातार बढ़ती है और मंडियों में प्याज की आवक बेहतर रहती है, तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। फिलहाल अलग-अलग शहरों और बाजारों में प्याज के दाम अलग हैं। इसलिए 80 रुपये प्रति किलो का भाव पूरे देश का औसत नहीं है। 28 अगस्त के सरकारी आंकड़ों में देश का औसत खुदरा भाव 37.87 रुपये प्रति किलो था।