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मोबाइल रिचार्ज प्लान हुआ महंगा, 16 फीसदी तक बढ़ीं कीमत, कई प्रीपेड प्लान हो गए बंद

Mobile recharge gets costlier: मोबाइल रिचार्ज की दुनिया में आपकी जेब पर बिना शोर-शराबे के बड़ा वार हो चुका है। मोबाइल रिचार्ज अब महंगा हो गया है...

मोबाइल रिचार्ज प्लान हुआ महंगा
मोबाइल रिचार्ज हुआ महंगा!- फोटो : social Media

Mobile recharge gets costlier: मोबाइल रिचार्ज की दुनिया में आपकी जेब पर बिना शोर-शराबे के बड़ा वार हो चुका है। टेलिकॉम कंपनियों ने इस बार सीधे टैरिफ बढ़ाने के बजाय ऐसे दांव चले हैं, जिनका असर ग्राहकों को रिचार्ज कराते वक्त समझ आ रहा है। एयरटेल ने 12 अगस्त 2026 को अपने 249, 299, 579, 619 और 649 रुपये वाले पांच प्रीपेड प्लान बंद कर दिए। अब इनकी जगह उपलब्ध विकल्प कई मामलों में 5 से 16 फीसदी तक महंगे पड़ रहे हैं। यही वजह है कि इसे साइलेंट हाइक कहा जा रहा है।

सबसे बड़ा झटका 299 रुपये वाले प्लान पर दिखता है। इस प्लान में 28 दिनों तक रोजाना 1.5GB डेटा मिलता था। अब समान अवधि के लिए अगला प्रमुख विकल्प 349 रुपये का है, जिसमें रोजाना 2GB डेटा मिलता है। यानी कीमत करीब 16 फीसदी बढ़ गई, भले ही डेटा बेनिफिट भी बढ़ाया गया हो। ग्राहक के सामने विकल्प तो मौजूद है, लेकिन कम कीमत वाला पुराना रास्ता बंद हो चुका है।

दूसरी तरफ रिलायंस जियो ने सीधे पुराने प्लान हटाने के बजाय जियो प्राइम मेंबरशिप पेश की है। 300 रुपये देकर ग्राहक एक साल तक प्राइस प्रोटेक्शन ले सकता है। यानी सदस्यता लेने के बाद जिस प्लान की मौजूदा कीमत है, वह तय अवधि तक उसी कीमत पर मिलता रहेगा। लेकिन इस सुविधा के लिए 300 रुपये की अतिरिक्त फीस देनी होगी। अगर इसे 12 महीनों में बांटें तो यह करीब 25 रुपये महीना बैठता है, यानी ग्राहक के मोबाइल बजट पर एक नया खर्च जुड़ गया है।मसलन, अगर जियो का 299 रुपये वाला प्लान 349 रुपये का हो जाता है, तो प्राइस प्रोटेक्शन लेने वाले ग्राहक को हर महीने करीब 50 रुपये की बचत हो सकती है। ऐसे में 300 रुपये की सदस्यता फीस लगभग छह महीने में वसूल हो सकती है। लेकिन अगर टैरिफ हाइक देर से होती है तो गणित बदल जाएगा। यानी जियो प्राइम का फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी कब और कितना टैरिफ बढ़ाती है।

टेलिकॉम सेक्टर में आने वाले महीनों को लेकर भी खतरे की घंटी बज रही है। सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च के मुताबिक जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया अगले तीन से चार महीनों में प्रीपेड टैरिफ में 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर सकते हैं। वहीं कुछ अन्य बाजार विश्लेषणों में अगले तीन से छह महीनों में 10 से 12 फीसदी तक वृद्धि की संभावना जताई गई है। यानी अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच मोबाइल यूजर्स पर एक और महंगाई का वार हो सकता है।

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वोडाफोन-आइडिया और BSNL ने फिलहाल बड़े स्तर पर पुराने प्लान बंद नहीं किए हैं। हालांकि एंट्री-लेवल पर नए विकल्प पेश किए गए हैं। बाजार की यह तस्वीर बताती है कि टेलिकॉम कंपनियां अब सिर्फ ग्राहकों की संख्या बढ़ाने के बजाय ARPU यानी प्रति ग्राहक औसत कमाई बढ़ाने पर ज्यादा जोर दे रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि कभी जियो की एंट्री ने भारतीय मोबाइल बाजार में डेटा क्रांति ला दी थी। 5 सितंबर 2016 को रिलायंस जियो लॉन्च हुआ और शुरुआती दौर में डेटा, वॉयस कॉल और रोमिंग जैसी सेवाओं को बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराया गया। इसके बाद प्रतिस्पर्धा में एयरटेल और आइडिया समेत दूसरी कंपनियों को भी टैरिफ में भारी कटौती करनी पड़ी। 2016 से पहले 1GB डेटा की कीमत करीब 225 रुपये बताई जाती थी, जबकि जियो की आक्रामक एंट्री के बाद डेटा की कीमतों में भारी गिरावट आई और 2018-19 तक औसत कीमत करीब 7.7 रुपये प्रति GB तक पहुंच गई।

अब वही टेलिकॉम बाजार एक नए दौर में प्रवेश करता दिख रहा है। पहले सस्ता डेटा हासिल करने की होड़ थी, अब कंपनियों की निगाहें ग्राहक से ज्यादा कमाई पर हैं। प्लान बंद करना हो, नया महंगा विकल्प देना हो या प्राइस प्रोटेक्शन के नाम पर सदस्यता शुल्क लेना हो दांव एक ही है, मोबाइल यूजर की जेब से ज्यादा रेवेन्यू निकालना।