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यातायात पुलिस मनाती रही सड़क सुरक्षा माह, उधर बिहार के इस जिले में 40 दिन में 40 लोगों ने सड़क हादसे में गंवाई जान

वैशाली जिले में इन दिनों सड़कें सफर के लिए नहीं, बल्कि जान जोखिम में डालने का पर्याय बन गई हैं । साल 2026 के शुरुआती 40 दिनों के भीतर ही जिले के विभिन्न हिस्सों में हुए सड़क हादसों में 40 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है

यातायात पुलिस मनाती रही सड़क सुरक्षा माह, उधर बिहार के इस जि

Vaishali - बिहार के वैशाली जिले में सड़कें अब सफर के लिए नहीं, बल्कि 'मौत के सफर' के रूप में पहचानी जाने लगी हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के शुरुआती 40 दिनों (1 जनवरी से 9 फरवरी) के भीतर जिले के विभिन्न हिस्सों में हुए हादसों में 40 लोगों की मौत हो चुकी है। स्थिति यह है कि जिले में औसतन हर दिन एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना का शिकार होकर अपनी जान गंवा रहा है। 

सड़क सुरक्षा माह के दावों की खुली पोल

हैरानी की बात यह है कि जनवरी माह में जब परिवहन विभाग और प्रशासन जोर-शोर से 'सड़क सुरक्षा माह' मना रहा था, उसी दौरान सबसे अधिक मौतें हुईं। जागरूकता अभियानों पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद केवल जनवरी महीने में ही 31 लोगों की सड़क हादसों में जान चली गई। फरवरी के शुरुआती 9 दिनों में भी 9 और लोगों की मौत ने सुरक्षा के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। 

यातायात नियमों की अनदेखी और दर्ज प्राथमिकी

सड़कों पर यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यातायात थाने में दर्ज 33 प्राथमिकी इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि नियमों का पालन सुनिश्चित कराने में तंत्र विफल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वाहनों की ओवरटेकिंग और चालकों की लापरवाही इन दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बन रही है, लेकिन हादसों के बाद पुलिस प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। 

प्रमुख मार्गों पर सर्वाधिक दुर्घटनाएं

जिले के तीन प्रमुख मार्ग दुर्घटनाओं के 'ब्लैक स्पॉट' बन गए हैं। जानकारी के अनुसार, हाजीपुर-मुजफ्फरपुर एनएच-22, हाजीपुर-महुआ मुख्य मार्ग और हाजीपुर-लालगंज रोड पर सबसे अधिक सड़क हादसे हो रहे हैं। इन मार्गों पर दुर्घटनाओं के बाद अक्सर स्थानीय लोग सड़क जाम कर विरोध भी जताते हैं, परंतु स्थिति में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। 

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अस्पतालों में घायलों की चीखें और रेफरल का सिलसिला

इन 40 दिनों के भीतर दो दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सदर अस्पताल तक घायलों की भीड़ देखी जा रही है। कई घायलों की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच (PMCH) रेफर किया गया है। गौरतलब है कि ये आंकड़े केवल उन मामलों के हैं जो थाने तक पहुंचे हैं, जबकि कई छोटे हादसों की प्राथमिकी दर्ज ही नहीं होती।