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बिहार पुलिस की बड़ी कार्रवाई: घूसखोर सब-इंस्पेक्टर सेवा से बर्खास्त, करोड़ों की सोने की हेराफेरी और रिश्वत का था आरोप

वैशाली में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टर सुमनजी झा को रिश्वत लेने और 1.5 किलो सोने की जब्ती में हेराफेरी करने के आरोप में 7 मार्च 2026 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

बिहार पुलिस की बड़ी कार्रवाई: घूसखोर सब-इंस्पेक्टर सेवा से बर

Vaishali - : बिहार पुलिस ने भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए वैशाली जिले में तैनात पुलिस उप-निरीक्षक (SI) सुमनजी झा को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। 7 मार्च 2026 से प्रभावी इस आदेश के साथ ही विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों के लिए खाकी में कोई जगह नहीं है। सुमनजी झा पर रिश्वत लेने और बरामद किए गए सोने की जब्ती सूची में हेराफेरी करने के गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं।

11 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ हुए थे गिरफ्तार

सुमनजी झा के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच तब शुरू हुई जब पवन कुमार नामक व्यक्ति ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना में शिकायत दर्ज कराई। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद 4 सितंबर 2024 को जाल बिछाया गया और सिवाईपट्टी थाना क्षेत्र के बंधारा बाजार के पास सुमनजी झा को 11,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत निगरानी थाना कांड संख्या 08/24 दर्ज की गई थी।

डेढ़ किलो सोने की हेराफेरी का खुला राज

रिश्वत कांड के बाद विभागीय जांच के दौरान सुमनजी झा के कारनामों की एक और परत खुली। उन पर आरोप लगा कि लालगंज थाना क्षेत्र में छापेमारी के दौरान बरामद किए गए लगभग 1.5 किलोग्राम सोने और अन्य कीमती सामग्री व नकदी को उन्होंने आधिकारिक जब्ती सूची (Seizure List) में पूरी तरह से नहीं दिखाया था। इस गबन को लेकर 5 जनवरी 2026 को लालगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत एक और प्राथमिकी दर्ज की गई।

विभागीय जांच में पाए गए दोषी

रिश्वत मामले में मुजफ्फरपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (पूर्वी-2) मनोज कुमार सिंह को संचालन अधिकारी नियुक्त किया गया था। गहन विभागीय कार्यवाही (संख्या 39/24) के बाद संचालन अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में सुमनजी झा को भ्रष्टाचार का दोषी पाया। सोने की हेराफेरी के मामले में भी उनके विरुद्ध अलग से विभागीय कार्यवाही (10/26) शुरू की गई है। विभाग ने माना कि ऐसे कृत्यों से न केवल पुलिस की छवि धूमिल होती है, बल्कि आम जनता का विश्वास भी टूटता है।

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अनुशासन का हवाला देते हुए बर्खास्तगी का आदेश

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, पुलिस विभाग एक अनुशासित संगठन है और इसमें भ्रष्टाचार के लिए कोई स्थान नहीं है। जांच प्राधिकार के मंतव्य और साक्ष्यों की गहन समीक्षा के बाद सक्षम प्राधिकारी ने सुमनजी झा को पुलिस सेवा के अयोग्य मानते हुए बर्खास्तगी का कड़ा निर्णय लिया। यह कार्रवाई जिले के अन्य पुलिस कर्मियों के लिए एक कड़ी चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।

रिपोर्ट - रिषभ कुमार