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Bihar Flood: बाढ़ में डूबा हाजीपुर का ऐतिहासिक कोनहारा घाट, अंतिम संस्कार को भी जगह नहीं

Bihar Flood: बिहार में बाढ़ की आफत के बीच वैशाली जिले से प्रशासनिक लापरवाही की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो इंसान को झकझोर देने वाली है। ...

Hajipur Flood
बाढ़ में डूबा कोनहारा घाट- फोटो : reporter

Bihar Flood: बिहार में बाढ़ की आफत के बीच वैशाली जिले से प्रशासनिक लापरवाही की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो इंसान को झकझोर देने वाली है। हाजीपुर का ऐतिहासिक कोनहारा घाट गंडक नदी के बढ़े जलस्तर की चपेट में आकर पूरी तरह पानी में डूब गया है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को अपनों की मौत के बाद शव का अंतिम संस्कार करने के लिए भी सुरक्षित जगह तलाशनी पड़ रही है। मजबूरी में लोग ऊंचे स्थान और विद्युत शवदाहगृह परिसर में लकड़ी के सहारे अंतिम संस्कार करने को विवश हैं।

गंगा और गंडक नदी के उफान से हाजीपुर के कई इलाकों में जलजमाव और बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। इसी बीच कोनहारा घाट की तस्वीरें प्रशासनिक इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। आम दिनों में जहां लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार आसानी से करते थे, वहीं अब चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है।

सबसे गंभीर बात यह है कि कोनहारा घाट पर बना विद्युत शवदाहगृह पिछले करीब 13 महीने से बंद पड़ा है। इसके चालू रहने पर लोग बिजली के जरिए शव का अंतिम संस्कार कर लेते थे, लेकिन लंबे समय से बंद होने की वजह से बाढ़ के इस दौर में लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।

शवदाहगृह के कर्मचारियों के मुताबिक, इसे दोबारा चालू कराने के लिए जुलाई 2025 से ही जिला प्रशासन को आवेदन दिया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी पाइपलाइन में खराबी और तकनीकी समस्या के कारण शवदाहगृह बंद है। कई बार आवेदन देने के बावजूद अब तक इसे दुरुस्त कर चालू नहीं कराया गया।

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अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे लोगों का कहना है कि बाढ़ की वजह से कोनहारा घाट पर शव जलाने की जगह तक नहीं बची है। विद्युत शवदाहगृह भी लंबे समय से बंद है। ऐसे में लोग मजबूरी में ऊंचे स्थान या शवदाहगृह परिसर में लकड़ी जलाकर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि जब वे अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे तो उन्हें पता चला कि विद्युत शवदाहगृह बंद है। लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द इसे चालू कराने की मांग की है, ताकि बाढ़ के बीच किसी परिवार को अपने मृत परिजन के अंतिम संस्कार के लिए इस तरह की दुश्वारियों का सामना न करना पड़े।

मामले को लेकर वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह से सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि बाढ़ के समय बिजली की समस्या होती है, जिसकी वजह से भी शवदाहगृह प्रभावित हो सकता है। उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। जब उनसे पूछा गया कि शवों के अंतिम संस्कार में लोगों को भारी परेशानी हो रही है, तो उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा कि मामले को देखा जाएगा।

हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर शवदाहगृह में तकनीकी खराबी पिछले 13 महीने से है और उसे चालू कराने के लिए लगातार आवेदन दिए जा रहे हैं, तो अब तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

बिहार सरकार बाढ़ को लेकर प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने और प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद पहुंचाने का निर्देश दे रही है। लेकिन कोनहारा घाट की तस्वीरें व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं। बाढ़ के बीच जहां लोगों को जिंदगी बचाने के लिए मदद की जरूरत है, वहीं मौत के बाद अपने परिजनों को अंतिम विदाई देने के लिए भी जगह नहीं मिलना बेहद गंभीर स्थिति है।

अगर प्रशासन समय रहते विद्युत शवदाहगृह को दुरुस्त कराकर चालू करा देता, तो शायद बाढ़ के इस संकट में लोगों की तकलीफ कुछ कम हो सकती थी। अब देखना होगा कि लगातार बंद पड़े शवदाहगृह को कब तक चालू कराया जाता है और कोनहारा घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था कब सामान्य होती है।

रिपोर्ट- ऋषभ कुमार