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मिड-डे मील खाने बाद दर्जनों बच्चे बीमार: खाने में छिपकली मिलने का आरोप, अस्पताल में चल रहा इलाज

Bihar News : वैशाली जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। जहां महुआ स्थित एक सरकारी स्कूल में मिड-डे-मिल खाने के बाद दर्जनों बच्चे बीमार हो गए है। जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल मे भर्ती कराया गया है। अभिभावक का आरोप है कि खाने में छिपकली पड़ी हुई थी....

मिड-डे मील खाने बाद दर्जनों बच्चे बीमार: खाने में छिपकली मिल
मिड-डे मील खाने बाद दर्जनों बच्चे बीमार- फोटो : रिषभ कुमार

Vaishali  : जिले के महुआ थाना क्षेत्र से एक बड़ी घटना सामने आई है, जहां एक सरकारी स्कूल में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) खाने के बाद दर्जनों बच्चों की तबीयत अचानक खराब हो गई। मामला उत्क्रमित मध्य विद्यालय नीलकंठपुर (अब्दुलपुर) का है, जहां भोजन करने के तुरंत बाद बच्चों को पेट दर्द और बेचैनी की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते कई बच्चों के बेहोश होने की भी खबर सामने आई, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। विद्यालय प्रशासन और स्थानीय लोगों की मदद से बीमार बच्चों को आनन-फानन में महुआ अनुमंडल अस्पताल और आसपास के निजी क्लीनिकों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।


खाने में छिपकली मिलने का आरोप, शिक्षक पर बच्चे को पीटने का दावा

इस घटना के बाद स्कूल के बाहर और अनुमंडल अस्पताल में गहमागहमी का माहौल बन गया। ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि बच्चों को परोसे गए मध्याह्न भोजन में मरी हुई छिपकली (विषैला कीड़ा) निकली थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब एक जागरूक बच्चे ने भोजन में छिपकली होने की बात वहां मौजूद शिक्षक को बताई, तो शिक्षक ने मामले को दबाने के लिए उल्टा उस बच्चे की बेरहमी से पिटाई कर दी। शिक्षक की इस संवेदनहीन कार्रवाई और बच्चों के बीमार पड़ने से गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया और विद्यालय प्रशासन व विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।


वेंडर और ग्रामीणों के दावों में उलझा मामला, बीडीओ ने साधी चुप्पी

बच्चों के बीमार पड़ने के असली कारणों को लेकर फिलहाल अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिससे मामला पूरी तरह उलझ गया है। स्कूल में भोजन सप्लाई करने वाले एकता शक्ति फाउंडेशन के प्रभारी और मेस इंचार्ज शिव शंकर कुमार ने खाने में किसी भी तरह के कीड़े या छिपकली मिलने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका दावा है कि एक बच्चा खाना खाने के बाद छुट्टी लेकर घर गया था, जहां पेट दर्द की शिकायत पर उसके परिजन स्कूल आकर शिक्षकों से उलझ गए और राजनीति के तहत माहौल बिगाड़ा गया। हालांकि, इस पूरे मामले पर आधिकारिक पक्ष जानने के लिए जब प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनसे बात नहीं हो सकी।


दोषी शिक्षकों का वेतन बंद करने और बर्खास्तगी की मांग पर अड़े अभिभावक

अस्पताल में अपने बच्चों के साथ पहुंचे अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। लोगों ने संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी एनजीओ के माध्यम से स्कूल में मध्याह्न भोजन की डिलीवरी की जाती है, तो गुणवत्ता खराब होने के डर से शिक्षक खुद उसे कभी नहीं खाते और सीधे अबोध बच्चों को परोस दिया जाता है। आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले विद्यालय के सभी संबंधित शिक्षकों का वेतन तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए और जांच पूरी कर उनके खिलाफ निलंबन व बर्खास्तगी जैसी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए।


अनुमंडल अस्पताल में डॉक्टरों की टीम मुस्तैद, बच्चों की स्थिति पर रखी जा रही नजर

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फिलहाल, महुआ अनुमंडल अस्पताल प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार भर्ती किए जा रहे बच्चों का प्राथमिक उपचार और हाइड्रेशन सुनिश्चित करने में जुटी हुई है। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, प्राथमिक इलाज के बाद अधिकांश बच्चों की स्थिति अभी नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। इलाके में तनाव और सड़क जाम को देखते हुए स्थानीय पुलिस भी मामले को शांत कराने और यातायात बहाल कराने के प्रयास में जुटी है। भोजन के सैंपल की जांच के बाद ही जिला प्रशासन की ओर से फूड प्वाइजनिंग की असली वजह की आधिकारिक पुष्टि की जा सकेगी।

रिषभ की रिपोर्ट