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कोसी प्रमंडल शिक्षक तबादला घोटाला: 16 साल बाद फूटा पाप का घड़ा, तत्कालीन डीईओ रामाशीष महतो पर बड़ी कार्रवाई

Bihar News : कोसी प्रमंडल के बहुचर्चित और व्यापक शिक्षक स्थानांतरण घोटाले में आखिरकार 16 साल बाद इंसाफ हुआ है।घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक, सुपौल के तत्कालीन डीईओ रामाशीष महतो पर सरकार ने बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है....

कोसी प्रमंडल शिक्षक तबादला घोटाला: 16 साल बाद फूटा पाप का घड

Saharsha/Patna : कोसी प्रमंडल के शिक्षा विभाग में वर्ष 2006 से 2010 के बीच हुए बहुचर्चित और व्यापक शिक्षक स्थानांतरण घोटाले में आखिरकार 16 साल बाद इंसाफ हुआ है। इस घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक, सुपौल के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) रामाशीष महतो के खिलाफ आरोप पूरी तरह सिद्ध होने पर सरकार ने बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की अंतिम सहमति मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(ख) के तहत दोषी पूर्व अधिकारी की पेंशन से ताउम्र पांच प्रतिशत राशि कटौती करने का कड़ा शासकीय आदेश जारी कर दिया है।

आरटीआई कार्यकर्ता के संघर्ष से मुख्यमंत्री के जनता दरबार तक पहुंचा मामला

इस बड़े घोटाले को उजागर करने और इसे अंजाम तक पहुंचाने का श्रेय 'जनसुराज' के जिलाध्यक्ष सह आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह को जाता है। उन्होंने साल 2010 से ही इस भ्रष्टाचार के खिलाफ दस्तावेजों, आवेदनों और आरटीआई के सहारे एक लंबी कानूनी लड़ाई शुरू की थी। जब अनिल कुमार सिंह इस पूरे मामले के पुख्ता सबूतों के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'जनता दरबार' में पहुंचे, तो मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल इसकी उच्च स्तरीय निगरानी जांच कराने की अनुशंसा कर दी। इसके बाद ही शिक्षा विभाग के इस बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हो सका।

नियमों को ताक पर रखकर हुआ था 'तबादला खेल'

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो और विभागीय संचालन पदाधिकारी की जांच में तत्कालीन डीईओ रामाशीष महतो पर लगे सभी गंभीर आरोप शत-प्रतिशत प्रमाणित पाए गए। जांच रिपोर्ट के अनुसार, उस दौर में सरकारी नियमों और विभागीय अधिसूचनाओं की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई थीं। पद रिक्त न होने के बावजूद पैसों और प्रभाव के बल पर मनमाने ढंग से स्थानांतरण किए गए। प्रमंडलीय स्थापना समिति की बिना स्वीकृति के ही तबादला आदेश जारी कर दिए गए, जिससे कई विद्यालयों में स्वीकृत क्षमता से अधिक शिक्षकों की पोस्टिंग हो गई और विषय विसंगति के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई। इसके अलावा, जिला इकाई से गलत तरीके से वेतन भुगतान कराकर भारी वित्तीय अनियमितता भी की गई।

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मुख्य आरोपी आरडीडीई को पहले ही मिल चुकी है सजा

कोसी प्रमंडल के इस पूरे महाघोटाले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने साल 2011 में ही अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी थी, जिसमें कुल 6 बड़े अधिकारियों को मुख्य रूप से दोषी पाया गया था। इनमें तत्कालीन क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक (RDDE) श्याम नारायण कुंवर भी शामिल थे। प्रमंडलीय स्थापना समिति के सर्वेसर्वा रहे मुख्य आरोपी श्याम नारायण कुंवर के खिलाफ विभाग ने साल 2016 में ही बड़ी कार्रवाई की थी। उनके खिलाफ आरोप सिद्ध होने पर तत्कालीन सरकार ने विभागीय ज्ञापांक द्वारा उनके पेंशन से 10 प्रतिशत की स्थाई कटौती का कड़ा दंड पहले ही मुकर्रर कर दिया था।

बीपीएससी की मुहर के बाद जारी हुआ अंतिम संकल्प

निगरानी विभाग द्वारा इस मामले में 09 जनवरी 2012 को निगरानी थाना कांड संख्या-003/12 दर्ज कर रामाशीष महतो को नामजद अभियुक्त बनाया गया था। विभागीय कार्यवाही के दौरान आरोपी अधिकारी ने खुद को महज स्थापना समिति का सदस्य बताकर बचने का प्रयास किया, जिसे शिक्षा विभाग ने सिरे से खारिज कर दिया। लंबे कानूनी उतार-चढ़ाव, साक्ष्यों की समीक्षा और आखिरकार 11 मई 2026 को बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा प्रस्तावित दंड पर अंतिम मुहर लगाए जाने के बाद 16 मई 2026 को यह ऐतिहासिक संकल्प जारी हुआ। इस फैसले ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में सेवाकाल खत्म होने के बाद भी दोषी बख्शे नहीं जाएंगे।

विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट