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सुपौल में अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर स्वास्थ्य विभाग का हंटर, नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले 9 केंद्रों को नोटिस

सुपौल जिले में अवैध रुप से चल रहे अल्ट्रासाउंड केन्द्रों पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विशेष जांच टीम की रिपोर्ट के बाद, सिविल सर्जन ने जिले के नौ प्रमुख अल्ट्रासाउंड केंद्रों को 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया है....

सुपौल में अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर स्वास्थ्य विभाग का ह
सुपौल में अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिले में बिना वैध पंजीकरण और नियमों की अनदेखी कर धड़ल्ले से चल रहे अल्ट्रासाउंड केंद्रों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। जिलाधिकारी के कड़े निर्देश पर गठित एमबीबीएस चिकित्सकों की विशेष जांच टीम की रिपोर्ट के बाद, सिविल सर्जन ने जिले के नौ प्रमुख अल्ट्रासाउंड केंद्रों को 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया है। विभाग ने सभी संबंधित संचालकों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपने पंजीकरण, नवीकरण और अन्य आवश्यक वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का सख्त अल्टीमेटम दिया है।


इन 9 बड़े केंद्रों पर गिरी गाज, छह बिंदुओं पर मांगा गया जवाब

सिविल सर्जन द्वारा जारी किए गए इस नोटिस में जिले के कई नामी संस्थान शामिल हैं। नोटिस पाने वाले केंद्रों में ग्लोबल अल्ट्रासाउंड डायग्नोस्टिक सेंटर, पी.एन. मेमोरियल अल्ट्रासाउंड क्लीनिक, प्रीत अल्ट्रासाउंड सेंटर, शंकर अल्ट्रासाउंड, राजा डायग्नोस्टिक, सनशाइन अल्ट्रासाउंड सेंटर, सूर्या डायग्नोस्टिक यूनिट, आराध्या अल्ट्रासाउंड सेंटर और लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड सेंटर शामिल हैं। इन सभी संचालकों से पंजीकरण आवेदन, नवीकरण के कागजात और बिना अनुमति के स्थान परिवर्तन जैसे छह महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।


नियमों का उल्लंघन करने वाले सेंटर्स को नहीं बख्शेगा प्रशासन

मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने साफ तौर पर कहा कि जिले में बिना रजिस्ट्रेशन या नियमों का उल्लंघन कर संचालित किसी भी अल्ट्रासाउंड केंद्र को कतई बख्शा नहीं जाएगा। सभी संस्थानों के लिए पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के प्रावधानों का अक्षरशः पालन करना अनिवार्य है। यदि निर्धारित समय के भीतर संचालकों द्वारा कोई संतोषजनक जवाब या वैध दस्तावेज नहीं सौंपे गए, तो विभाग बिना किसी देरी के संबंधित केंद्रों को सील करते हुए उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का रुख करेगा।


भ्रूण लिंग जांच जैसी अवैध गतिविधियों पर लगेगी लगाम

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस बड़ी कार्रवाई से जिले के चिकित्सा क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी और भ्रूण लिंग जांच जैसी घिनौनी व अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रूप से रोक लगाई जा सकेगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कोई एक बार की कार्रवाई नहीं है, बल्कि भविष्य में भी ऐसे संदिग्ध केंद्रों की औचक और नियमित जांच जारी रहेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से कानून और निर्धारित मानकों के दायरे में हों।


पकड़े जाने पर जेल और भारी जुर्माने का है कड़ा प्रावधान

आपको बता दें कि पीसी-पीएनडीटी (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques) अधिनियम, 1994 के तहत बिना वैध पंजीकरण के कोई भी डायग्नोस्टिक सेंटर चलाना या बिना अनुमति मशीन का स्थान बदलना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। इस कानून के तहत पहली बार दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की जेल और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, दोबारा यही अपराध दोहराने पर पांच वर्ष तक की कैद और एक लाख रुपये तक के जुर्माने के साथ-साथ केंद्र का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द करने का प्रावधान है।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट