कोसी के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन अलर्ट : डीएम सावन कुमार ने किया कोसी बराज का मुआयना, अभियंताओं और अधिकारियों को दिए कई निर्देश
मानसून के दस्तक देते ही कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। डीएम ने जल संसाधन विभाग के अभियंताओं और अधिकारियों को संभावित बाढ़ की चुनौती से निपटने के लिए 24 घंटे मुस्तैद रहने का निर्देश दिया है...

Supaul : मानसून के आगमन के साथ ही कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सुपौल जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड में आ गया है। इसी सिलसिले में सोमवार को जिलाधिकारी (डीएम) सावन कुमार ने कोसी बराज का उच्च स्तरीय निरीक्षण किया। डीएम ने बराज के विभिन्न हिस्सों, फाटकों और मुख्य तटबंधों की वर्तमान स्थिति का बारीकी से जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जल संसाधन विभाग के अभियंताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को पूरी तरह अलर्ट रहने का निर्देश दिया। डीएम ने दो टूक कहा कि संभावित बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए समय रहते सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं ताकि किसी भी आपात स्थिति से त्वरित रूप से निपटा जा सके।
जलस्तर के पल-पल के बदलाव पर रहेगी नजर, नाव, मोटरबोट और राहत सामग्री दुरुस्त रखने का निर्देश
जिलाधिकारी ने कोसी बराज के नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) का अवलोकन कर वर्तमान डिस्चार्ज (पानी के बहाव) की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि नदी के जलस्तर में होने वाले प्रत्येक बदलाव की चौबीसों घंटे लाइव मॉनिटरिंग की जाए। डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया कि बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय संसाधनों को एक्टिव मोड में रखा जाए। इसके साथ ही राहत एवं बचाव कार्य में इस्तेमाल होने वाली सरकारी व निजी नावों, लाइफ जैकेट, मोटरबोट, सूखा राशन, आवश्यक दवाओं और पर्याप्त मानवबल (रेस्क्यू टीम) की उपलब्धता का डेटाबेस अद्यतन (अपडेट) रखने को कहा गया है।
संवेदनशील इलाकों और कटाव स्थलों की होगी विशेष निगरानी, अफवाह फैलाने वालों पर सख्ती
डीएम सावन कुमार ने क्षेत्र के सभी संवेदनशील और अतिसंवेदनशील तटबंधों की पहचान कर वहां विशेष गश्ती और निगरानी बढ़ाने का आदेश दिया। उन्होंने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लगातार क्षेत्र भ्रमण पर रहें। यदि नदी की तेज धारा के कारण कहीं भी कटाव या सिपेज (रिसाव) की स्थिति सामने आती है, तो बिना वक्त गंवाए तत्काल फ्लड फाइटिंग (बाढ़ निरोधक) कार्य शुरू कर दिए जाएं। इसके साथ ही प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया या स्थानीय स्तर पर जलस्तर और तटबंध टूटने को लेकर फैलने वाली किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
सुरक्षित शरण स्थलों और स्वास्थ्य सेवाओं का पहले से तैयार होगा ब्लूप्रिंट, बेहतर समन्वय अनिवार्य
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि आम जनता के जान-माल की सुरक्षा करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए उन्होंने आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, पशुपालन और जिला आपूर्ति विभाग के बीच बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोसी के निचले इलाकों और संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों की सूची तैयार कर ली जाए ताकि जलस्तर खतरे के निशान को पार करते ही वहां के नागरिकों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों (रिलीफ कैंपों) पर समय से पहुंचाया जा सके। इन शरण स्थलों पर शुद्ध पेयजल, अस्थाई शौचालय और मेडिकल कैंप की व्यवस्था के लिए अभी से ब्लूप्रिंट तैयार रखने का निर्देश दिया गया है।
एसपी शरथ आर.एस. और जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता भी रहे मौजूद
उल्लेखनीय है कि उत्तर बिहार की शोक कही जाने वाली कोसी नदी में हर साल बरसात के दिनों में नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली भारी बारिश के कारण बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। इस बार तैयारियों को पुख्ता करने के लिए डीएम के साथ पुलिस अधीक्षक (SP) शरथ आर.एस. भी मुख्य रूप से मौजूद रहे। एसपी ने बराज और तटबंधों की सुरक्षा व्यवस्था तथा पुलिस बलों की तैनाती की समीक्षा की। इस मौके पर जल संसाधन विभाग के वीरपुर शीर्ष कार्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता बबन पांडेय समेत कई तकनीकी अधिकारी और प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित थे, जिन्होंने बराज की तकनीकी स्थिति से डीएम को अवगत कराया।
विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट
















