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कोरियापट्टी में मिली 150 साल पुरानी हस्तलिखित श्री दुर्गा सप्तशती की दुर्लभ पांडुलिपि, प्रशासन ने तेज किया 'खोज अभियान'

Bihar News : सुपौल जिले से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण और दुर्लभ धरोहर सामने आई है। यहां करीब 150 वर्ष पुरानी हस्तलिखित 'श्री दुर्गा सप्तशती' की पांडुलिपि प्राप्त हुई है...

कोरियापट्टी में मिली 150 साल पुरानी हस्तलिखित श्री दुर्गा सप
सुपौल में मिला 150 साल पुरानी हस्तलिखित श्री दुर्गा सप्तशती की दुर्लभ पांडुलिपि- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिले के कोरियापट्टी से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण और दुर्लभ धरोहर सामने आई है। यहां करीब 150 वर्ष पुरानी हस्तलिखित 'श्री दुर्गा सप्तशती' की पांडुलिपि प्राप्त हुई है। इस ऐतिहासिक खोज ने क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक और प्राचीन परंपराओं को एक नई पहचान दी है, जिसे स्थानीय इतिहास और संस्कृति के दृष्टिकोण से एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

डेढ़ सौ वर्षों से इसी पांडुलिपि से पाठ की है अनूठी परंपरा:

इस दुर्लभ और बहुमूल्य पांडुलिपि को सुरक्षित सामने लाने में स्थानीय निवासी रविशेखर सिंह का विशेष सहयोग रहा, जबकि इसका विधिवत संरक्षण जवाहर मिश्रा के कुशल मार्गदर्शन में किया गया। इस धरोहर की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि कोरियापट्टी दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान पिछले डेढ़ सौ वर्षों से इसी हस्तलिखित श्री दुर्गा सप्तशती से पाठ करने की गौरवशाली परंपरा लगातार निभाई जा रही है।

जिले भर में शुरू हुआ 'पांडुलिपि खोज अभियान':

इस ऐतिहासिक धरोहर के प्रकाश में आने के बाद जिला प्रशासन के साथ-साथ कला एवं संस्कृति विभाग पूरी तरह से एक्शन में आ गया है। विभाग की ओर से अब पूरे सुपौल जिले में व्यापक स्तर पर ‘पांडुलिपि खोज अभियान’ चलाया जा रहा है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले के कोने-कोने में छिपी ऐसी ही प्राचीन, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासतों को खोजकर उन्हें संरक्षित करना है, ताकि सुपौल के गौरवशाली इतिहास को राष्ट्रीय और वैश्विक पटल पर पहचान दिलाई जा सके।

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प्रशासन की अपील: अपनी धरोहरों को बचाने आगे आएं जिलावासी:

जिला प्रशासन और संबंधित विभाग ने आम जनता से इस मुहिम में बढ़-चढ़कर सहयोग करने की भावुक अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि यदि किसी भी जिलावासी के पास या उनकी जानकारी में कोई भी प्राचीन पांडुलिपि, ऐतिहासिक दस्तावेज, ताम्रपत्र या सांस्कृतिक धरोहर मौजूद हो, तो उसकी जानकारी तुरंत विभाग को साझा करें। प्रशासन ने सचेत किया कि इस खोज अभियान के समापन में अब केवल कुछ ही दिन शेष बचे हैं, इसलिए लोग बिना समय गंवाए अपनी साझी विरासत को बचाने के लिए आगे आएं।

विभाग ने जारी किया संपर्क नंबर, सहभागिता की मांग:

प्राचीन धरोहरों को लुप्त होने और नष्ट होने से बचाने के लिए जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी कार्यालय की ओर से एक आधिकारिक संपर्क नंबर 8092281780 भी जारी किया गया है। विभाग ने आम जनता से पुरजोर आह्वान किया है कि वे इस पुनीत कार्य में सहभागी बनें, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों, प्राचीन संस्कृति और महान परंपराओं से रूबरू रह सकें और इतिहास के ये पन्ने हमेशा के लिए अमर हो जाएं।

विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट