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कोसी की सांस्कृतिक विरासत का महाकुंभ: सुपौल में 'राष्ट्रीय लोकगाथा भगैत महासंगम 2026' का भव्य आयोजन

कोसी की सांस्कृतिक विरासत का महाकुंभ: सुपौल में 'राष्ट्रीय ल
कोसी की सांस्कृतिक विरासत का महाकुंभ- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिला मुख्यालय स्थित रतन रिसॉर्ट रविवार को कोसी क्षेत्र की समृद्ध और ऐतिहासिक लोक-संस्कृति का गवाह बना। अखिल भारतीय लोकगाथा भगैत महासभा के तत्वावधान में आयोजित 'राष्ट्रीय लोकगाथा भगैत महासंगम-2026' का भव्य शुभारंभ किया गया। महासभा के संयोजक सह प्रवक्ता डॉ. अमन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव और पिपरा विधायक रामविलास कामत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

भगैत को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का दर्जा दिलाने और कलाकारों को पेंशन का वादा 

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि सुपौल की इस पावन धरती ने साबित कर दिया है कि कोसी के कंठ में आज भी लोककला और सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध परंपरा पूरी तरह जीवंत है। उन्होंने भगैत को बिहार की अनमोल सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए घोषणा की कि इसे 'अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' (Intangible Cultural Heritage) की सूची में शामिल कराने हेतु केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने आजीवन लोकगाथा की साधना करने वाले कलाकारों को राजकीय पेंशन, आधिकारिक पहचान और स्थायी मंच उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।

लोककला के संरक्षण और सामाजिक मूल्यों पर अतिथियों के विचार 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि कोसी की माटी ने हमेशा से देश व समाज को सांस्कृतिक मार्ग दिखाने का काम किया है। उन्होंने भगैत को सामाजिक मूल्यों, सत्य और आपसी भाईचारे से जुड़ी सशक्त लोकपरंपरा बताया। वहीं पिपरा विधायक रामविलास कामत और पूर्व विधायक प्रो. डॉ. विनोद कुमार यादवेंद्र ने सुपौल में आयोजित इस संगम की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय से उपेक्षित बुजुर्ग लोकसाधकों को सम्मानित करना और इस विधा को सहेजना वर्तमान पीढ़ी के लिए एक अनुकरणीय पहल है।

'बाबा धर्मराज शिरोमणि सम्मान' से वयोवृद्ध लोककलाकारों का भावुक अभिनंदन 

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कार्यक्रम का सबसे संवेदनशील और भावुक क्षण वह रहा जब वर्षों से लोकगाथा गायन में समर्पित वयोवृद्ध कलाकारों को ‘बाबा धर्मराज शिरोमणि सम्मान’ से अलंकृत किया गया। सम्मान स्वरूप मंच पर अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र प्राप्त करते समय कई बुजुर्ग लोकगायकों की आंखें खुशी और सम्मान के अहसास से छलका आईं। दशकों तक अभावों में भी इस विधा को जीवित रखने वाले इन कला-साधकों का पूरा सदन ने खड़े होकर कर्तल ध्वनि से अभिनंदन किया।

लोक-साधकों की उपस्थिति और मनमोहक पारंपरिक प्रस्तुतियां 

इस महासंगम में रुदल पंजियार, श्याम पंजियार, सिकंदर यादव, ब्रह्मदेव यादव, अनंत लाल यादव, लक्ष्मी यादव, शत्रुधन यादव, कुलानंद यादव और रूबेन पंजियार सहित राज्य भर से आए सैकड़ों लोक कलाकारों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों द्वारा दी गई भगैत की पारंपरिक और लयबद्ध प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को कोसी की सदियों पुरानी गाथा परंपरा और लोक-संस्कृति से सराबोर कर दिया।

विनय कुमार मिश्रा का रिपोर्ट