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सहरसा में दबंगई का नंगा नाच! रास्ता बंद कर पूरा परिवार को किया गया कैद,प्रशासन पर उठे सवाल

Bihar News: एक पीड़ित परिवार, जो बीते 25 वर्षों से एक रास्ते का इस्तेमाल अपने घर आने-जाने के लिए करता रहा, अचानक उस राह से महरूम कर दिया गया है।...

Saharsa Family Locked In 25 Year
इंसाफ के इंतजार में कैद परिवार- फोटो : reporter

Bihar News: सहरसा के सदर थाना क्षेत्र के भेलवा वार्ड नंबर 3 से एक ऐसा संगीन मामला सामने आया है, जिसने कानून और इंसाफ की बुनियाद पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक पीड़ित परिवार, जो बीते 25 वर्षों से एक रास्ते का इस्तेमाल अपने घर आने-जाने के लिए करता रहा, अचानक उस राह से महरूम कर दिया गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि परिवार अपने ही आशियाने में नजरबंद होकर रह गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, मुख्य सड़क से घर तक पहुंचने का यही एकमात्र रास्ता था, जिसे अब रैयती जमीन बताकर एक कथित जमींदार द्वारा बंद कर दिया गया है। आरोप है कि उक्त शख्स ने वहां जबरन निर्माण कार्य शुरू कर दिया, जिससे रास्ता पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया। यह हरकत न सिर्फ गैरकानूनी कब्जे की बू देती है, बल्कि सीधे तौर पर मानवाधिकारों के हनन का मामला भी बनती नजर आ रही है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि वे पिछले दो वर्षों से इंसाफ की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन के तमाम जिम्मेदार अफसरों डीएम, एसडीओ, सीओ और थाना प्रभारी को कई दफा दरख्वास्त दी, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला, कार्रवाई नहीं। यह सुस्ती और लापरवाही प्रशासनिक तंत्र की नाकामी को उजागर करती है।

जब स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो मजबूर होकर परिवार ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग ने मामले की नजाकत को देखते हुए एसपी और डीएम से कई बार रिपोर्ट तलब की, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया है। यह रवैया खुद में गंभीर लापरवाही और जवाबदेही से बचने की कोशिश माना जा रहा है।

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इलाके में इस पूरे मामले को लेकर खासी नाराजगी और बेचैनी का माहौल है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक परिवार के बुनियादी अधिकारों का हनन होने के बावजूद प्रशासन क्यों खामोश बैठा है? अगर इस विवाद ने उग्र रूप लिया और कोई अप्रिय वारदात हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किस पर तय होगी? यह मामला अब सिर्फ एक रास्ते का नहीं, बल्कि न्याय और व्यवस्था की साख का बन चुका है, जहाँ हर गुजरते दिन के साथ सवाल और भी तीखे होते जा रहे हैं।

रिपोर्ट- छोटू सरकार