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शिक्षक दिवस पर अनूठा विरोध: छपरा में बिना पढ़ाई रोके शिक्षकों ने बांधी काली पट्टी, जानें क्या हैं मांगें

सारण से शिक्षक दिवस पर मांझी प्रखंड में शिक्षकों का अनूठा विरोध। पढ़ाई बाधित किए बिना काली पट्टी बांधकर चलाईं कक्षाएं। पुरानी पेंशन और टीईटी अनिवार्यता को लेकर उठाई आवाज।

Bihar Teacher Protest
मांझी में काली पट्टी बांधकर पढ़ाया, पुरानी पेंशन की मांग- फोटो : Reporter

एक तरफ जहां देशभर में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर शिक्षक दिवस का उत्सव मनाया जा रहा था, वहीं बिहार के सारण जिले में शिक्षकों का आक्रोश देखने को मिला। मांझी प्रखंड के शीतलपुर और अरियाव गांव स्थित मध्य विद्यालयों सहित कई प्राथमिक व मध्य विद्यालयों के शिक्षकों ने अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। खास बात यह रही कि शिक्षकों ने शिक्षण कार्य बाधित किए बिना बेहद अनुशासित तरीके से कक्षाओं का संचालन करते हुए अपना असंतोष दर्ज कराया।

पुरानी पेंशन और टीईटी अनिवार्यता को लेकर नाराजगी

बिहार के शिक्षकों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, समान काम के लिए समान वेतन और टीईटी (TET) की अनिवार्यता जैसे लंबित मुद्दों को लेकर गहरा आक्रोश है। शिक्षक दिवस जैसे पावन अवसर पर शिक्षकों द्वारा काली पट्टी बांधना राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की नीतियों के प्रति उनके गहरे असंतोष और उपेक्षा के भाव को साफ उजागर करता है। शिक्षकों का मानना है कि लंबे समय से उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

संगठन की एकजुटता और मजबूत नेतृत्व

बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन ने शिक्षक समुदाय के भीतर अद्भुत एकजुटता दिखाई। संघ के जिला अध्यक्ष अभय कुमार सिंह, संरक्षक ब्रजेश कुमार सिंह और आलोक कुमार सिंह के नेतृत्व में प्रखंड स्तर के शिक्षकों ने एक स्वर में अपनी आवाज बुलंद की। इस अनुशासित आंदोलन के जरिए शिक्षकों ने साबित कर दिया कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह से संगठित और प्रतिबद्ध हैं।

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संवादहीनता और अनदेखी से बढ़ा रोष

शिक्षकों का यह अनुशासित कदम शासन-प्रशासन और नीति निर्माताओं के बीच संवादहीनता की स्थिति को भी दर्शाता है। जहां एक ओर राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षकों के योगदान को सराहा जा रहा है, वहीं जमीनी स्तर पर शिक्षकों को अपनी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका यह वैचारिक संघर्ष जारी रहेगा।

सरकार को चेतावनी, बड़े आंदोलन के संकेत

संघ और शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगों का न्यायसंगत समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले दिनों में वे और भी उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। शिक्षकों के इस रुख से स्पष्ट है कि यदि असंतोष का हल जल्द नहीं निकाला गया, तो राज्य का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो सकता है। फिलहाल शिक्षकों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखकर सरकार को गंभीरता से विचार करने का संदेश दिया है।

सारण से धर्मेन्द्र रस्तोगी की रिपोर्ट