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Bihar News: सीमांचल की सियासत का मजबूत स्तंभ ढहा, छह बार के विधायक अब्दुल जलील मस्तान का निधन

Bihar News: सीमांचल की सियासत के कद्दावर नेता, अमौर के पूर्व विधायक और बिहार के पूर्व उत्पाद एवं निबंधन मंत्री अब्दुल जलील मस्तान का नई दिल्ली स्थित फोर्टिस अस्पतालमें इलाज के दौरान निधन हो गया।...

Six Time MLA Abdul Jalil Mastan Dies
अब्दुल जलील मस्तान का निधन- फोटो : reporter

Bihar News: सीमांचल की सियासत के कद्दावर नेता, अमौर के पूर्व विधायक और बिहार के पूर्व उत्पाद एवं निबंधन मंत्री अब्दुल जलील मस्तान का नई दिल्ली स्थित फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके इंतकाल की खबर मिलते ही पूर्णिया, अमौर समेत पूरे सीमांचल में मातम पसर गया। कांग्रेस समर्थकों, स्थानीय लोगों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा अफसोस जताया है।वे दो हफ्तों से दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे। उनकी किडनी, हार्ट और लीवर में इन्फेक्शन की शिकायत थी। अब्दुल जलील मस्तान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं और अमौर विधानसभा क्षेत्र से 6 बार विधायक रह चुके हैं।

अब्दुल जलील मस्तान लंबे अरसे तक अमौर विधानसभा क्षेत्र की सियासत का प्रमुख चेहरा रहे। उन्होंने छह बार विधायक के तौर पर क्षेत्र की नुमाइंदगी की। लगातार जनता के बीच सक्रिय रहने और स्थानीय मुद्दों पर मुखर रहने के कारण क्षेत्र में उनकी मजबूत सियासी पकड़ मानी जाती थी। उनके निधन को सीमांचल की राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।

वर्ष 2015 में बिहार में महागठबंधन सरकार के गठन के बाद अब्दुल जलील मस्तान को उत्पाद, मद्य निषेध एवं निबंधन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके मंत्री कार्यकाल का सबसे अहम अध्याय वर्ष 2016 में सामने आया, जब बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू किया गया। उस वक्त उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग उन्हीं के जिम्मे था। लिहाजा बिहार में शराबबंदी लागू किए जाने के दौर में उनके मंत्री कार्यकाल को भी अहम माना जाता है।

मस्तान की सियासी यात्रा सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं रही। सीमांचल के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता ने उन्हें कांग्रेस के प्रमुख क्षेत्रीय चेहरों में शुमार किया। अमौर की जनता के साथ उनका लंबे समय का जुड़ाव उनकी राजनीतिक पहचान का अहम हिस्सा रहा।

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नई दिल्ली के एम्स में अंतिम सांस लेने के बाद अब उनके पार्थिव शरीर को गृह क्षेत्र लाने की तैयारी की जा रही है। अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार को लेकर समर्थकों और स्थानीय लोगों में शोक का माहौल है।अब्दुल जलील मस्तान के निधन से सीमांचल की राजनीति में एक बड़ा सियासी खालीपन पैदा हुआ है। छह बार विधायक और राज्य सरकार में मंत्री रहे इस वरिष्ठ नेता की विदाई को कांग्रेस ही नहीं, बल्कि पूरे सीमांचल के राजनीतिक गलियारे के लिए एक अपूरणीय क्षति के तौर पर देखा जा रहा है।

देवांशु प्रभात की रिपोर्ट