NEET 2027 : गोल एजुकेशन विलेज में नीट 2027 के विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शन संगोष्ठी का हुआ आयोजन, विशेषज्ञों ने दिए सफलता के जरुरी टिप्स
NEET 2027 : नीट 2027 की तैयारी को सुनियोजित दिशा देने और विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से गोल एजुकेशन विलेज में एक विशेष मार्गदर्शन संगोष्ठी का आयोजन किया गया.....पढ़िए आगे

PATNA : नीट 2027 की तैयारी को सुनियोजित दिशा देने और विद्यार्थियों में आत्मविश्वास विकसित करने के उद्देश्य से गोल एजुकेशन विलेज में मार्गदर्शन संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें विषयों की गहरी समझ, नियमित पुनरावृत्ति, प्रश्नों के अभ्यास, समय प्रबंधन तथा परीक्षा के दबाव से निपटने की रणनीतियों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को समझाया कि प्रत्येक परीक्षा के परिणाम को अपनी तैयारी सुधारने के अवसर के रूप में देखना चाहिए। संगोष्ठी को गोल इंस्टीट्यूट के सीएमडी बिपिन सिंह, सहायक निदेशक रंजय सिंह, अनुसंधान एवं विकास प्रमुख आनंद वत्स, गोल एजुकेशन विलेज के मुख्य प्रशासक बिनीत तथा आईजीआईएमएस की मेडिको कृतिका एवं मेडिको अमितेश ने संबोधित किया।
लक्ष्य के प्रति ईमानदारी और निरंतरता ही सफलता का आधार
गोल इंस्टीट्यूट के सीएमडी बिपिन सिंह ने कहा, “चिकित्सक बनने का सपना केवल एक प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण करने तक सीमित नहीं है; यह भविष्य में समाज के प्रति बड़ी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प भी है। इस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए अपनी दिनचर्या, प्रयास और अनुशासन के प्रति ईमानदार रहना होगा। किसी एक परीक्षा में कम अंक आने से अपनी क्षमता का निर्णय न करें। अपनी कमियों को पहचानें और प्रतिदिन उन्हें दूर करने की दिशा में काम करें।” उन्होंने विद्यार्थियों से अभिभावकों के विश्वास को प्रेरणा बनाकर धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ तैयारी जारी रखने का आह्वान किया।
पढ़ाई के घंटों के साथ सीखने का परिणाम भी तय करें
सहायक निदेशक रंजय सिंह ने कहा, “हर विद्यार्थी को दिन की शुरुआत स्पष्ट लक्ष्य से और दिन का समापन अपने कार्य की समीक्षा से करना चाहिए। केवल यह गिनना पर्याप्त नहीं है कि कितने घंटे पढ़े; यह देखना भी जरूरी है कि कितनी अवधारणाएँ समझीं, कितने प्रश्न हल किए और कितनी गलतियाँ सुधारीं। कक्षा, स्वाध्याय, पुनरावृत्ति, नियमित परीक्षण और शंका समाधान को एक साथ अपनाने से तैयारी मजबूत होती है।”उन्होंने कहा कि कठिनाई छिपाने से उसका समाधान नहीं होता। विद्यार्थियों को शिक्षकों से संवाद करना चाहिए और संदेह को अगले अध्याय तक लंबित नहीं रखना चाहिए।
हर टेस्ट के बाद गलतियों का कारण खोजें
अनुसंधान एवं विकास प्रमुख आनंद वत्स ने कहा, “टेस्ट देने के बाद केवल अंक और रैंक देखना अधूरा मूल्यांकन है। विद्यार्थी यह पहचानें कि प्रश्न अवधारणा की कमी, तथ्य भूलने, गणना की त्रुटि, जल्दबाजी अथवा समय प्रबंधन के कारण गलत हुआ। गलती का कारण स्पष्ट होगा, तभी सुधार की रणनीति प्रभावी बनेगी।”उन्होंने एनसीईआरटी के गहन अध्ययन, विषयवार अभ्यास और त्रुटि-पंजी बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चिन्हित कमजोरियों पर दोबारा अभ्यास करके यह जाँचना भी जरूरी है कि सुधार हुआ या नहीं।
नियमित दिनचर्या से बढ़ती है तैयारी की गुणवत्ता
गोल एजुकेशन विलेज के मुख्य प्रशासक बिनीत ने कहा, “शैक्षणिक वातावरण का पूरा लाभ तभी मिलता है, जब विद्यार्थी समय पर कक्षाओं में पहुँचें, निर्धारित स्वाध्याय करें और उपलब्ध मार्गदर्शन का उपयोग करें। संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या एकाग्रता बनाए रखने में सहायक हैं। किसी भी शैक्षणिक या व्यवस्थागत कठिनाई की जानकारी समय पर दें, ताकि उसका समाधान किया जा सके।”
दूसरों से तुलना के बजाय अपनी प्रगति पर ध्यान दें
आईजीआईएमएस की मेडिको कृतिका ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “तैयारी के दौरान कभी आत्मविश्वास बढ़ता है तो कभी परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं आते। ऐसे समय में दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी पिछली स्थिति से प्रगति की तुलना करें। छोटे और स्पष्ट लक्ष्य बनाएँ, उन्हें पूरा करें और कठिन विषयों से बचने के बजाय उन पर नियमित समय दें। लगातार किया गया प्रयास ही आत्मविश्वास को मजबूत बनाता है।”
अभ्यास में ही विकसित करें परीक्षा की आदतें
आईजीआईएमएस के मेडिको अमितेश ने कहा, “विषय का ज्ञान होने के साथ परीक्षा में उसका सही उपयोग करना भी सीखना पड़ता है। समयबद्ध प्रश्न अभ्यास करें, प्रश्न ध्यान से पढ़ें और उत्तर देने से पहले यह समझें कि पूछा क्या गया है। मॉक टेस्ट में प्रश्न चयन, समय के बँटवारे और अंतिम समीक्षा की आदत विकसित करें। परीक्षा के बाद गलतियों का विश्लेषण अगले प्रयास को बेहतर बनाने का सबसे उपयोगी साधन है।”संगोष्ठी का केंद्रीय संदेश रहा कि नीट 2027 की तैयारी में सफलता की दिशा प्रतिदिन के छोटे, मापने योग्य सुधारों से तय होगी। नियमित अध्ययन, परीक्षण, शंका समाधान और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के समन्वय से विद्यार्थी अपनी तैयारी को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
















