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नवादा में छात्राओं को कन्या विद्यालय से मिश्रित स्कूल भेजने का अभिभावकों ने किया कड़ा विरोध, डीएम से लगाई सुरक्षा की गुहार

नवादा जिले में गर्ल्स स्कूल की छात्राओं को को-एजुकेशन वाले स्कूलों में स्थानांतरित करने के प्रशासनिक प्रस्ताव का अभिभावकों ने पुरजोर विरोध किया है। अभिभावको ने 8 से 12 वर्ष की छोटी बेटियों को सह-शिक्षा वाले स्कूल में भेजने से साफ इनकार कर दिया है...

नवादा में छात्राओं को कन्या विद्यालय से मिश्रित स्कूल भेजने
नवादा में छात्राओं के स्कूल ट्रांसफर पर बवाल- फोटो : अमन सिन्हा

Nawada : जिले में 'पीएम श्री योजना' के तहत राजकीय कन्या मध्य विद्यालय की छात्राओं को गांधी इंटर विद्यालय में स्थानांतरित करने के प्रशासनिक प्रस्ताव का अभिभावकों ने पुरजोर विरोध किया है। अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित अभिभावकों ने इस संबंध में जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने दोटूक शब्दों में अपनी 8 से 12 वर्ष की छोटी बेटियों को सह-शिक्षा वाले स्कूल में भेजने से साफ इनकार कर दिया है।


क्या है पूरा प्रशासनिक मामला?

केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी पीएम श्री योजना के अंतर्गत नवादा जिले के कुल 21 विद्यालयों को अपग्रेडेशन के लिए चिन्हित किया गया है, जिसमें नवादा नगर का गांधी इंटर विद्यालय भी शामिल है। इस नई व्यवस्था के तहत राजकीय कन्या मध्य विद्यालय की कक्षा 6 की छात्राओं को गांधी इंटर विद्यालय में शिफ्ट किया जाना है। स्कूल प्रशासन जहां उच्च स्तर से मिले सरकारी निर्देशों का पालन कर रहा है, वहीं अभिभावक इस कदम के खिलाफ लामबंद हो गए हैं।


मिश्रित स्कूल को लेकर अभिभावकों की चिंताएं और सुरक्षा का तर्क

अभिभावकों का तर्क है कि वर्तमान राजकीय कन्या मध्य विद्यालय केवल लड़कियों का स्कूल है, जहां महिला शिक्षिकाएं छात्राओं की व्यक्तिगत और संवेदनशील देखभाल करती हैं। इसके विपरीत, गांधी इंटर विद्यालय में लड़के और लड़कियां एक साथ (Co-ed) पढ़ते हैं। समाज में छोटी बच्चियों के साथ बढ़ रही अपराध की घटनाओं का हवाला देते हुए एक अभिभावक ने कहा, "आजकल छोटी-छोटी बच्चियों के साथ क्या-क्या हो रहा है, हम सब जानते हैं। ऐसी स्थिति में हम अपनी बेटियों को मिश्रित विद्यालय में सुरक्षित महसूस नहीं करते और एक जगह लड़का-लड़की को साथ नहीं पढ़ा सकते।"


जिलाधिकारी से हस्तक्षेप और विकल्प की मांग

अभिभावकों ने जिलाधिकारी से इस संवेदनशील मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने अपने आवेदन में यह भी सुझाव दिया है कि यदि ट्रांसफर करना बेहद जरूरी है, तो नगर के अन्य कन्या विद्यालयों का विकल्प चुना जा सकता है, लेकिन गांधी इंटर विद्यालय उन्हें किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने प्रशासन से आश्वासन मांगा है कि उनकी बच्चियों को वर्तमान कन्या विद्यालय में ही रहने दिया जाए।


मामले की जांच और आगे की कार्रवाई का आश्वासन

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जिलाधिकारी ने पीड़ित अभिभावकों की गंभीर चिंताओं को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जांच के बाद ही आगे की उचित कार्रवाई की जाएगी। यह पूरा विवाद बिहार में आधुनिक शिक्षा नीतियों और बालिकाओं की जमीनी सुरक्षा व्यवस्था के बीच खड़े एक बड़े सामाजिक द्वंद्व को उजागर करता है, जहाँ आज भी छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में परिवार लड़कियों के लिए सिर्फ कन्या-विशेष विद्यालयों पर ही सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं।

अमन सिन्हा की रिपोर्ट