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Bihar Temple Mystery: तीन महीने पानी में डूबे रहते हैं महादेव, मुंगेर के इस मंदिर का रहस्य आज भी बरकरार, पानी आता कहां से है और जाता कहां?

Bihar Temple Mystery: मुंगेर जिले के तारापुर में एक ऐसा शिव मंदिर है, जहां हर साल करीब तीन महीने तक भगवान शिव पानी में विराजमान रहते हैं। ...

Munger Shiva Temple Stays Underwater for Three Months
तीन महीने पानी में डूबे रहते हैं महादेव- फोटो : reporter

Bihar Temple Mystery:  मुंगेर जिले के तारापुर में एक ऐसा शिव मंदिर है, जहां हर साल करीब तीन महीने तक भगवान शिव पानी में विराजमान रहते हैं। जून के आसपास मंदिर के गर्भगृह में अचानक पानी भरना शुरू होता है। धीरे-धीरे पानी का स्तर बढ़ता जाता है और वहां स्थापित पंचमुखी शिवलिंग पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। इसके बाद कई हफ्तों तक बाबा तारेश्वरनाथ इसी तरह जल में विराजमान रहते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि करीब तीन महीने बाद यही पानी धीरे-धीरे अपने आप गायब भी हो जाता है।यह मंदिर उल्टा स्थान महादेव के नाम से प्रसिद्ध है और इसे तारेश्वरनाथ मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर की पहचान सिर्फ धार्मिक आस्था और प्राचीन परंपराओं से नहीं, बल्कि गर्भगृह में होने वाले इस अनोखे मौसमी जलभराव से भी जुड़ी है।

पानी आता कहां से है, यही सबसे बड़ा सवाल

स्थानीय लोगों के बीच इस जलभराव को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। मान्यता है कि गर्भगृह में पानी निकालने की कोशिश के बावजूद यह पूरी तरह सूखता नहीं और कुछ समय बाद फिर पानी दिखाई देने लगता है। फिर लगभग तीन महीने के बाद पानी अपने आप गायब हो जाता है।यही वजह है कि मंदिर को लेकर लोगों के मन में सवाल भी हैं और श्रद्धा भी। पानी का स्रोत क्या है? यह हर साल लगभग एक ही समय पर क्यों भरता है और फिर कुछ महीनों बाद अपने आप कहां चला जाता है? 

श्रद्धालु मानते हैं बाबा का जल-शयन

स्थानीय मान्यता के मुताबिक जिस साल बाबा तारेश्वरनाथ जल-शयन करते हैं, उस साल इलाके में अच्छी बारिश होती है। श्रद्धालु इसे समृद्धि, बेहतर फसल और क्षेत्र में सुख-शांति से जोड़कर देखते हैं।

मंदिर का नाम भी है अपने आप में अनोखा

इस मंदिर की खासियत सिर्फ गर्भगृह में पानी भरने तक सीमित नहीं है। स्थानीय परंपरा में मंदिर की बनावट और यहां भगवान शिव एवं माता पार्वती की स्थापना की दिशा को सामान्य शिव मंदिरों से अलग बताया जाता है। इसी वजह से इसे उल्टा स्थान महादेव कहा जाता है।हर साल पानी का आना, पंचमुखी शिवलिंग का जलमग्न होना और फिर कुछ महीनों बाद गर्भगृह का दोबारा सूख जाना—तारापुर के लोगों और श्रद्धालुओं के लिए आस्था का विषय है।आस्था इसे बाबा तारेश्वरनाथ का जल-शयन मानती है, जबकि जिज्ञासा इसके पीछे छिपे प्राकृतिक कारण को तलाशती है। यही आस्था और रहस्य का संगम तारापुर के उल्टा स्थान महादेव मंदिर को बेहद खास बनाता है।

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रिपोर्ट- मो. इम्तियाज खान