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Bihar News: सरस्वती पूजा से पहले मुंगेर के मूर्तिकारों की परीक्षा, रात-दिन एक कर मां को दे रहे अंतिम रूप, समय पर मूर्ति देना चुनौती

Bihar News: सरस्वती पूजा को लेकर जिले भर में माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो चुका है। कल यानी 23 जनवरी को होने वाली पूजा से पहले तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं।

Munger Sculptors Race Against Time to Complete Saraswati Ido
सरस्वती पूजा से पहले मुंगेर के मूर्तिकारों की परीक्षा- फोटो : reporter

Bihar News: सरस्वती पूजा को लेकर जिले भर में माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो चुका है। कल यानी 23 जनवरी को होने वाली पूजा से पहले तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। इसी बीच सबसे बड़ा दबाव है मूर्तिकारों पर, जिनके कंधों पर आस्था की जिम्मेदारी और रोज़ी-रोटी दोनों का बोझ है। ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में मूर्तिकार दिन-रात जुटे हुए हैं। खासकर मुंगेर में यह मेहनत सिर्फ काम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा और पहचान बन चुकी है।

सरस्वती पूजा में अब महज एक दिन का वक्त बचा है। ऐसे में मुंगेर के विभिन्न इलाकों में मूर्तिकारों की कार्यशालाएं रात तक गुलज़ार हैं। मूर्तिकार बताते हैं कि वे दो महीने पहले ही मिट्टी गूंथकर मां की प्रतिमा बनाने में जुट जाते हैं, ताकि पूजा समितियों और श्रद्धालुओं की मांग समय पर पूरी हो सके। कहीं रंग-रोगन का काम चल रहा है, तो कहीं साज-सज्जा और बारीक नक्काशी से प्रतिमा को मनोहारी रूप दिया जा रहा है।

मुंगेर में कई ऐसे परिवार हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह प्रतिमा निर्माण पर निर्भर है। सरस्वती पूजा, दुर्गा पूजा और काली पूजा इनके लिए सिर्फ धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि साल भर की कमाई का बड़ा जरिया भी है। सुबह से देर रात तक बिना थके ये कारीगर मां सरस्वती की मुस्कान, वीणा और हंस के हर भाव को गढ़ने में लगे हैं। यह कला और श्रम का ऐसा संगम है, जो बाजार की सियासत से अलग आस्था की ज़मीन पर खड़ा है।

मूर्तिकारों का कहना है कि इस बार महंगाई ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मिट्टी, रंग, बांस, कपड़ा और सजावट के सामान की कीमतें बढ़ चुकी हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की भावना को देखते हुए उन्होंने कीमतों में ज्यादा इजाफा नहीं किया। उनका कहना है कि जब पूजा पंडालों में मां सरस्वती विराजमान होती हैं और श्रद्धालु हाथ जोड़कर नमन करते हैं, तो सारी थकान अपने आप उतर जाती है।

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कुल मिलाकर, सरस्वती पूजा से पहले मुंगेर के मूर्तिकारों की मेहनत, कला और आस्था अपने चरम पर है। यह सिर्फ प्रतिमाओं का निर्माण नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और मेहनतकश जीवन की वह तस्वीर है, जहां ज्ञान की देवी के साथ कारीगरों की उम्मीदें भी आकार ले रही हैं।

रिपोर्ट- मो. इम्तियाज खान