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मुंगेर में वकीलों का बड़ा फैसला: न्यायिक दंडाधिकारी किरण कुमारी की कोर्ट का दो दिनों तक करेंगे पूर्ण बहिष्कार

मुंगेर जिले में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (Judicial Magistrate First Class) किरण कुमारी की कार्यप्रणाली के विरोध में वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा है। वकीलो ने न्यायिक दंडाधिकारी किरण कुमारी की कोर्ट का दो दिनों तक पूर्ण बहिष्कार करने का एलान किया

मुंगेर में वकीलों का बड़ा फैसला: न्यायिक दंडाधिकारी किरण कुम
मुंगेर में वकीलों का बड़ा फैसला- फोटो : इम्तियाज खान

Munger : जिले से न्यायिक व्यवस्था और अधिवक्ताओं के बीच टकराव की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मुंगेर में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (Judicial Magistrate First Class) किरण कुमारी की कार्यप्रणाली के विरोध में वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा है। मुंगेर विधिज्ञ संघ (बार एसोसिएशन) के सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण आमसभा की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि आगामी 15 और 16 जून 2026 को सभी अधिवक्ता किरण कुमारी के न्यायालय का पूर्ण रूप से बहिष्कार करेंगे।


बहिष्कार की अवधि को लेकर हुआ विचार-विमर्श

गुरुवार को हुई इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान कोर्ट बहिष्कार के समय को लेकर संघ के पदाधिकारियों के बीच गहन चर्चा हुई। विधिज्ञ संघ के महासचिव त्रिपुरारी कुमार वर्मा ने शुरू में उक्त कोर्ट का एक सप्ताह तक बहिष्कार करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, संघ के अध्यक्ष शशि शेखर सिंह ने दो दिनों के सांकेतिक लेकिन कड़े बहिष्कार की बात कही। काफी विचार-विमर्श के बाद दोनों पक्षों में आम सहमति बनी और अंततः लगातार दो दिनों (15 और 16 जून) तक अदालत के कार्य से अलग रहने का फैसला मुहरबंद हुआ।


हाईकोर्ट और जिला जज से शिकायत के बाद भी नहीं सुधरे हालात

अधिवक्ताओं के अनुसार, न्यायिक दंडाधिकारी किरण कुमारी के रवैये को लेकर विवाद काफी पुराना है। इससे पहले भी उनकी उपेक्षापूर्ण कार्यप्रणाली और व्यवहार में सुधार के लिए जिला जज और पटना हाईकोर्ट से लिखित शिकायत की गई थी। इसके बावजूद जब उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया, तो सैकड़ों अधिवक्ताओं ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षर कर विधिज्ञ संघ को एक शिकायती पत्र सौंपा था, जिसके बाद इस आमसभा का आयोजन कर कड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया गया।


अशोभनीय भाषा और मनमाने न्यायिक फैसलों का आरोप

आमसभा की बैठक के दौरान न्यायिक दंडाधिकारी के खिलाफ कई गंभीर और व्यावहारिक आरोप लगाए गए। वकीलों का कहना है कि अदालत में अधिवक्ताओं के साथ अशोभनीय, असंसदीय और अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा, जमानती धाराओं (Bailable Offences) में भी अभियुक्तों को जेल भेजने की धमकी दी जाती है और 'रिश्तेदार बेलर (जमानती)' लाने का नियम विरुद्ध बहाना बनाकर आरोपियों को बेवजह न्यायिक अभिरक्षा में रखा जाता है। वकीलों ने यह भी आरोप लगाया कि अदालत में खुलेआम कहा जाता है कि 'यह अदालत मेरी है और यहाँ मेरी ही मर्जी चलेगी।'


महज ढाई महीने के भीतर आमने-सामने आए वकील और जज

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आपको बता दें कि न्यायिक दंडाधिकारी किरण कुमारी ने इसी साल 30 मार्च को मुंगेर में प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के पद पर अपना योगदान दिया था। पदभार ग्रहण करने के महज ढाई महीने के भीतर ही वकीलों के साथ इस तरह के बड़े गतिरोध और मनमाने न्यायिक तरीके अपनाने के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। विधिज्ञ संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वकीलों के सम्मान और सही न्यायिक प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए यह आंदोलन बेहद जरूरी हो गया था।

इम्तियाज की रिपोर्ट