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Bihar News: भक्ति ने बदला सफर का अंदाज, हाथों पर 105 KM चल रहे बिच्छू बम, हर कदम पर गूंज रहा हर-हर महादेव

Bihar News: सावन में आपने कांवड़ियों को पैदल चलते तो खूब देखा होगा, लेकिन पश्चिम बंगाल के एक शिवभक्त की भक्ति और साधना का अंदाज देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

Bihar News: भक्ति ने बदला सफर का अंदाज, हाथों पर 105 KM चल र
अनोखी आस्था यात्रा- फोटो : IMTIYAZ

Munger: सावन में आपने कांवड़ियों को पैदल चलते तो खूब देखा होगा, लेकिन पश्चिम बंगाल के एक शिवभक्त की भक्ति और साधना का अंदाज देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे। यह कहानी है उत्तर दिनाजपुर के 28 वर्षीय राजकुमार महतो की, जो पैरों से नहीं, बल्कि दोनों हाथों के सहारे सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर तक करीब 105 किलोमीटर की कठिन यात्रा पर निकले हैं। उनकी अनोखी मुद्रा देखकर श्रद्धालुओं ने उन्हें ‘बिच्छू बम’ नाम दे दिया है। राजकुमार जब कांवड़िया पथ पर आगे बढ़ते हैं तो उनका शरीर जमीन के बेहद करीब रहता है, दोनों हाथों पर पूरा वजन टिका होता है और दोनों पैर हवा में ऊपर उठे रहते हैं। देखने में उनकी यह मुद्रा बिल्कुल बिच्छू जैसी नजर आती है। शरीर की यह कठिन स्थिति बनाकर आगे बढ़ते हुए उनकी जुबां पर लगातार भोलेनाथ का नाम रहता है।

राजकुमार की यह यात्रा महज कोई सामान्य धार्मिक सफर नहीं, बल्कि उनके लिए आस्था, संकल्प और तपस्या का इम्तिहान है। बताया जा रहा है कि वह लगातार 20 दिनों से इसी तरह हाथों के सहारे यात्रा कर रहे हैं। इस कठिन साधना की रफ्तार भी बेहद धीमी है। राजकुमार एक दिन में करीब डेढ़ किलोमीटर ही इस अंदाज में आगे बढ़ पाते हैं। ऐसे में 105 किलोमीटर का यह सफर उनके धैर्य और हौसले की कड़ी परीक्षा ले रहा है।

खास बात यह भी है कि राजकुमार पहली बार इस तरह की कठिन यात्रा नहीं कर रहे। वह दूसरी बार हाथों के बल सुल्तानगंज से बाबाधाम की ओर रवाना हुए हैं। यानी एक बार इस तपस्या को पूरा करने के बाद उन्होंने दोबारा उसी कठिन राह को चुनने का संकल्प लिया।

कांवड़िया पथ से जब ‘बिच्छू बम’ गुजरते हैं तो श्रद्धालुओं की नजरें ठहर जाती हैं। कोई उनकी तस्वीर और वीडियो बनाने लगता है तो कोई ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारों से उनका हौसला बढ़ाता है।राजकुमार महतो का यह अनोखा सफर बताता है कि आस्था की राह में मंजिल तक पहुंचने के लिए सिर्फ कदम ही नहीं, संकल्प भी चाहिए। हाथों के बल धीरे-धीरे आगे बढ़ता यह शिवभक्त आज कांवड़िया पथ पर श्रद्धा, जज्बे और अद्भुत साधना का जीवंत उदाहरण बन गया है।

NSIT
Nsmch

इम्तियाज़ की रिपोर्ट