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मां इश्क़ की रंगरेली मनाने के लिए हुई गुम, तीन मासूम भूखे-प्यासे, पिता जेल में, ममता का गला घोंट भागी आशिका

Bihar News: जहाँ एक ओर मां भगवान का दूसरा रूप मानी जाती है, वहीं दूसरी ओर रूपा देवी नामक इस कलयुगी मां ने माँ-बच्चों के पवित्र रिश्ते को अपने इश्क़ की आग में स्वाहा कर दिया।...

 मां इश्क़ की रंगरेली मनाने के लिए हुई गुम, तीन मासूम भूखे-प
मां इश्क़ की रंगरेली मनाने के लिए हुई गुम- फोटो : reporter

Bihar News: "पुत्र कपूत सुने हैं, पर न माता सुनी कुमाता",मगर बिहार के वलीपुर दलित बस्ती से आई ये दास्तान ममता के नाम पर कलंक बन चुकी है।जहाँ एक ओर मां भगवान का दूसरा रूप मानी जाती है, वहीं दूसरी ओर रूपा देवी नामक इस कलयुगी मां ने माँ-बच्चों के पवित्र रिश्ते को अपने इश्क़ की आग में स्वाहा कर दिया।

मामला कुछ यूं है  रूपा देवी अपने प्रेमी प्रेम कुमार के साथ मुंगेर के कंपनी गार्डन में इश्क लुटा रही थी, तभी पति राहुल मौके पर पहुंचा। गुस्से में तमतमाया राहुल अपने चचेरे भाई और पत्नी के प्रेमी प्रेम कुमार पर चाकू से हमला कर बैठा।नतीजा? राहुल गया जेल... और रूपा को मिल गई ‘आज़ादी की चाबी’।

जेल जाते पति को तो शायद उम्मीद थी कि उसके पीछे उसके बच्चे और पत्नी महफ़ूज़ होंगे। मगर रूपा ने तो कलयुग की हर हदें लांघते हुए तीन मासूम बच्चों – सृष्टि, रुद्र और सिद्धार्थ – को छोड़, प्रेम के रंग में रंगी होकर प्रेमी के साथ फरार होने का रास्ता चुन लिया।

अब बच्चे लावारिस हालात में, भूखे-प्यासे, गली-गली माँ को तलाशते फिर रहे हैं।इनकी आँखों में न कोई सपने बचे, न कोई आसरा।छत है, मगर ममता नहीं; दीवारें हैं, मगर गोद नहीं।पूरी बस्ती स्तब्ध है, समाज शर्मसार है, और रिश्तों की कब्रगाह पर सन्नाटा पसरा है।

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रूपा ने न सिर्फ़ अपने पति को जाल में फंसाकर जेल भेजा, बल्कि अपने ‘मातृत्व’ को भी प्रेम के बदले गिरवी रख दिया।अब प्रशासन और समाज मिलकर इन मासूमों की देखभाल का प्रयास कर रहे हैं, मगर सवाल यह है कि क्या कोई संस्था कभी उस माँ की कमी पूरी कर पाएगी जो इश्क़ में अंधी होकर अपने बच्चों को ज़िंदा यतीम छोड़ गई?

ये घटना महज़ एक घरेलू विवाद नहीं, बल्कि उस इंसानियत की हत्या है जिसमें माँ सबसे बड़ी रक्षक मानी जाती है।रूपा देवी, अब आपके नाम के आगे “माँ” नहीं, माफ़ कीजिए... सिर्फ़ ‘कलंक’ जुड़ता है!

रिपोर्ट- मो. इम्तियाज खान