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Bihar Religion conversion: एक ही परिवार के 6 सदस्यों का धर्म परिवर्तन, वैदिक रीति से संपन्न हुआ समारोह

Bihar Religion conversion: नट जाति से ताल्लुक रखने वाले रफीक मियां के परिवार के छह सदस्यों ने कथित तौर पर हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया है, जिससे क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।...

Six Family Members Convert Religion in Vedic Ceremony
एक परिवार के छह सदस्यों ने हिंदू धर्म अपनाया- फोटो : reporter

Bihar Religion conversion: बिहार के मोतिहारी जिले के तुरकौलिया क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक माहौल में नई बहस को जन्म दे दिया है। नट जाति से ताल्लुक रखने वाले रफीक मिया के परिवार के छह सदस्यों ने कथित तौर पर हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया है, जिससे क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। यह पूरा घटनाक्रम नर्सिंग बाबा मंदिर में विधि-विधान और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न हुआ, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन कराया गया और सभी के माथे पर तिलक लगाकर उन्हें औपचारिक रूप से हिंदू परंपरा से जोड़ा गया।

परिवार के सदस्यों का कहना है कि उनके पूर्वज मूल रूप से हिंदू थे और किसी परिस्थिति के कारण उनके दादा ने वर्षों पहले धर्म परिवर्तन किया था, जिसके बाद से पूरा परिवार उसी परंपरा में जीवन यापन कर रहा था। अब उन्होंने अपनी इच्छा और आस्था के आधार पर पुनः हिंदू धर्म अपनाने का निर्णय लिया है। उनका दावा है कि इस फैसले में किसी प्रकार का दबाव या जबरदस्ती शामिल नहीं थी, बल्कि यह पूरी तरह व्यक्तिगत विश्वास और आस्था का परिणाम है।

मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान के बाद माहौल उस समय और भी उत्साहपूर्ण हो गया जब परिवार के सदस्यों ने जय श्रीराम और बजरंग बली की जय के नारे लगाए। स्थानीय लोगों की मौजूदगी में यह पूरा कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसने इलाके में धार्मिक और सामाजिक चर्चा को और अधिक तेज कर दिया है।

हालांकि इस घटना के बाद सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे आस्था की स्वतंत्र अभिव्यक्ति बता रहे हैं, तो कुछ इसे सामाजिक संरचना में बदलाव के रूप में देख रहे हैं। वहीं स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी इस घटनाक्रम को लेकर हलचल देखी जा रही है, जहां विभिन्न पक्ष अपने-अपने दृष्टिकोण से इसकी व्याख्या कर रहे हैं। कुल मिलाकर मोतिहारी का यह मामला अब सिर्फ एक धार्मिक बदलाव की घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह आस्था, पहचान और सामाजिक विमर्श के नए अध्याय के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में और भी चर्चाएं तेज होने की संभावना है।

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रिपोर्ट- हिमांशु कुमार