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Bihar News : कटिहार के 'मैंगो मैन' का कमाल ! कालिदास बनर्जी के बगीचे की मिठास अब पहुंची दिल्ली-गुजरात तक, महानायकों और 'मोदी' के नाम पर रखे आमों के नाम

Bihar News : कटिहार के रौतरा गांव में लगभग 10 एकड़ में फैले बगीचे की आम अब दिल्ली, गुजरात तक भी अपनी मिठास परोस रहा है.....पढ़िए आगे

Bihar News : कटिहार के 'मैंगो मैन' का कमाल ! कालिदास बनर्जी
बिहार का मैंगों मैंन- फोटो : SOCIAL MEDIA

KATIHAR : बिहार के कटिहार जिले के रौतरा गाँव से एक बेहद दिलचस्प और गौरवशाली खबर सामने आ रही है। यहाँ के रहने वाले "मैंगो मैन" के नाम से मशहूर कालिदास बनर्जी के अथक प्रयासों से अब कटिहार का आम देश भर में 'खास' बन चुका है। रौतरा गाँव में लगभग 10 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला यह बगीचा सीमांचल का सबसे बड़ा आम का बगीचा माना जाता है। इस बगीचे के आमों की खुशबू और मिठास अब सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली और गुजरात जैसे बड़े राज्यों तक अपनी खास पहचान बना चुकी है।

बचपन के शौक ने बनाया 'मैंगो मैन'

कालिदास बनर्जी को आम की बागवानी और नई किस्में तैयार करने का हुनर विरासत में मिला है। उन्होंने बचपन से ही अपने पिता के साथ रहकर आम की ग्राफ्टिंग (कलम बांधने की तकनीक) सीखी। पिता से मिले इस पारंपरिक ज्ञान और अपने कड़े अनुभव के दम पर उन्होंने आम की कई नई और अनूठी वैरायटियों (किस्मों) का इजाद किया है। आज उनकी इसी विशेषज्ञता के कारण पूरा इलाका उन्हें आदर से 'मैंगो मैन' कहकर पुकारता है।

महानायकों और 'मोदी आम' के नाम से मिली नई पहचान

कालिदास बनर्जी के इस प्रयास की सबसे बड़ी और अनूठी विशेषता इन आमों का नामकरण है। अमूमन लोग अपनी नई खोज या फसलों का नाम अपने परिजनों के नाम पर रखते हैं, लेकिन कालिदास ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने देश के प्रति अपनी कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करते हुए इन खास आमों के नाम देश के महानायकों और राष्ट्र को विशेष पहचान दिलाने वाली शख्सियतों के नाम पर रखा है। उनके बगीचे में आज 'स्वामी विवेकानंद आम', 'चितरंजन दास आम' और 'मोदी आम' आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं।

दूर-दूर तक फैल रही है कटिहार के आमों की खुशबू

फिलहाल आम का मौसम अपनी चरम पर है और ऐसे में 'मैंगो मैन' के बगीचे के ये खास आम देश के कोने-कोने में पहुँच रहे हैं। अपनी विशिष्ट बनावट, बेहतरीन स्वाद और अलग सुगंध के कारण इन आमों की मांग दिल्ली और गुजरात के बाजारों में बहुत ज्यादा है। यह अनूठा प्रयास न केवल कालिदास बनर्जी को पहचान दिला रहा है, बल्कि इसके जरिए पूरे कटिहार जिले की मिठास और साख भी देश स्तर पर बढ़ रही है।

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स्थानीय लोगों में हर्ष, मिल रही है खूब सराहना

कालिदास बनर्जी की इस बड़ी उपलब्धि और अनूठी सोच से स्थानीय ग्रामीण और जिले के लोग बेहद प्रभावित हैं। आसपास के लोग और बागवानी से जुड़े जानकार उनके इस अभिनव प्रयास की जमकर सराहना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कालिदास ने अपनी मेहनत से न सिर्फ सीमांचल का नाम रौशन किया है, बल्कि देश के महानायकों को सम्मान देने का एक बेहद खूबसूरत और अनोखा तरीका भी दुनिया के सामने पेश किया है।

श्याम की रिपोर्ट