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Bihar News:5 करोड़ का पुल, मगर रास्ता गायब, पांच साल से अधर में लटका निर्माण, जनता पूछ रही-जब चढ़ेंगे ही नहीं तो पुल किस काम का?

Bihar News: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क/संपर्क योजना के तहत करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा पसंटा पुल आज भी लोगों के लिए महज एक अधूरा ढांचा बनकर खड़ा है।

Bihar News:5 करोड़ का पुल, मगर रास्ता गायब, पांच साल से अधर
कब खत्म होगा इंतजार- फोटो : SHYAM

Katihar: जिले के डंडखोरा प्रखंड में करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजना अब सवालों के घेरे में है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क/संपर्क योजना के तहत करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा पसंटा पुल आज भी लोगों के लिए महज एक अधूरा ढांचा बनकर खड़ा है। पुल का निर्माण तो लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन दोनों छोर पर अप्रोच पथ नहीं बनने के कारण यह पुल पांच वर्षों से जनता के किसी काम नहीं आ रहा है। महेशपुर पंचायत क्षेत्र में बस्तोल-सनौली पीडब्ल्यूडी सड़क को महेशपुर, मखना और झूनकी से जोड़ने के उद्देश्य से 142.07 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य 3 सितंबर 2020 को शुरू किया गया था। निर्धारित समय सीमा के अनुसार यह काम 2 सितंबर 2021 तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन तय अवधि बीतने के लगभग पांच साल बाद भी पुल पर आवागमन शुरू नहीं हो सका है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग की लापरवाही के कारण करोड़ों रुपये की परियोजना अधर में लटक गई है। पुल के दोनों ओर अप्रोच पथ नहीं बनने से हजारों ग्रामीणों को आज भी 4 से 5 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस सुविधा के लिए पुल बनाया गया था, वह आज तक धरातल पर नहीं उतर सकी। 

इलाके के लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि कहीं तकनीकी खामियां या विभागीय खींचतान तो इस परियोजना की राह में रोड़ा नहीं बन गई। पांच साल से निर्माण कार्य ठप रहने के कारण अब लोग इस पुल की उपयोगिता और सरकारी कार्यशैली पर सवाल उठाने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अप्रोच पथ ही नहीं बनना था तो करोड़ों रुपये खर्च कर पुल निर्माण का क्या औचित्य था? यह पुल करीब दस हजार से अधिक आबादी के लिए लाइफलाइन साबित हो सकता है। इसके शुरू होने से न केवल आवागमन आसान होगा बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलेगी। लेकिन फिलहाल पुल के दोनों सिरों पर अधूरा काम विकास के दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है।

वहीं बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि पुल निर्माण और अप्रोच पथ से जुड़ी समस्या की जानकारी ली जाएगी तथा जल्द समाधान निकालकर परियोजना को पूरा कराया जाएगा। हालांकि जनता अब आश्वासनों से आगे बढ़कर जमीनी कार्रवाई देखना चाहती है। फिलहाल पसंटा पुल विकास की उस अधूरी कहानी का प्रतीक बन गया है, जहां करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जनता को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा। अब सबकी निगाहें सरकार और विभागीय अधिकारियों पर टिकी हैं कि आखिर यह पुल लोगों के लिए कब खुलेगा और पांच साल का इंतजार कब खत्म होगा।

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रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह