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Bihar News : रामलखन सिंह यादव कॉलेज में विवाद को लेकर प्रभारी प्राचार्य ने रखा पक्ष, शैक्षणिक माहौल और सरकारीकरण को बताया प्राथमिकता

Bihar News : जहानाबाद स्थित रामलखन सिंह यादव कॉलेज में 15 अगस्त को हुए विवाद के बाद प्रभारी प्राचार्य प्रो. डॉ. संजय यादव ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संस्थान की स्थिति स्पष्ट की......पढ़िए आगे

Bihar News : रामलखन सिंह यादव कॉलेज में विवाद को लेकर प्रभार
विवाद पर प्राचार्य की सफाई - फोटो : SOCIAL MEDIA

JEHANABAD : रामलखन सिंह यादव कॉलेज, जहानाबाद में 15 अगस्त को हुए घटनाक्रम के बाद प्रभारी प्राचार्य प्रो. डॉ. संजय यादव ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कॉलेज की वर्तमान व्यवस्था, विश्वविद्यालयीय संबद्धता, सरकारीकरण की मांग और हाल के विवाद को लेकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कॉलेज को वर्षों से चली आ रही समस्याओं से निकालकर बेहतर शैक्षणिक वातावरण देना प्राथमिकता है और कॉलेज से जुड़े विवादों का समाधान  विश्वविद्यालयीय प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। प्रो. डॉ. संजय यादव ने कहा कि 15 अगस्त के घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर कॉलेज को लेकर अलग-अलग बातें प्रसारित हुई हैं। इस संबंध में कॉलेज के सचिव चंद्र प्रकाश की ओर से जिला प्रशासन तथा मगध विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव को आवेदन देकर कॉलेज का पक्ष पहले ही रखा जा चुका है। उन्होंने कहा कि अब जरूरी है कि विवाद को बढ़ाने के बजाय कॉलेज के भविष्य और विद्यार्थियों के हित पर ध्यान दिया जाए।

नागेंद्र कुमार उर्फ छोटन यादव  के द्वारा स्वतंत्रता दिवस के दिन असामाजिक हरकत करने और विवाद खड़ा करने का उल्लेख करते हुए प्रभारी प्राचार्य ने आरोप लगाया कि कॉलेज को फिर से राजनीतिक विवाद का अखाड़ा बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिनके पूर्वजों ने कॉलेज के लिए जमीन उपलब्ध करायी थी, आज जमीन की बढ़ी हुई कीमत के बीच कॉलेज के विकास और सरकारीकरण की मांग को लेकर चल रही प्रक्रिया उन्हें नागवार गुजर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कारण उक्त द्वारा कॉलेज को विवाद और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की कोशिश की जा रही है। प्रभारी प्राचार्य ने कॉलेज की पुरानी संबद्धता व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से 2022 के बीच करीब पांच सचिव बदले, लेकिन इस अवधि में विश्वविद्यालयीय संबद्धता का मामला आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने कहा कि संबद्धता नहीं होने के कारण नामांकन की प्रक्रिया प्रभावित हुई। नामांकन नहीं होने से सरकार से मिलने वाले अनुदान की प्रक्रिया भी प्रभावित रही और अनुदान नहीं मिलने के कारण उससे जुड़े शिक्षकों एवं कर्मचारियों के भुगतान भी लंबित रहे। उन्होंने कहा कि बाद में कॉलेज की संबद्धता के मामले को प्राथमिकता दी गयी। पहले तीन वर्षों के लिए विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त की गयी और इसके बाद स्थायी संबद्धता की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ायी गयी। उन्होंने कहा कि कॉलेज की व्यवस्था को विश्वविद्यालयीय नियमों के अनुरूप व्यवस्थित करने का प्रयास लगातार जारी है।

डॉ. संजय यादव ने बताया कि वह वर्ष 2004 से कॉलेज से जुड़े हुए हैं और बाद में प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने कहा कि प्रभारी प्राचार्य के रूप में उनकी नियुक्ति विश्वविद्यालय की निर्धारित प्रक्रिया और नियमों के अनुसार हुई है।संबंधित प्रबंधन समिति, विश्वविद्यालय प्रतिनिधि और सरकारी प्रतिनिधियों समेत सदस्यों की सहमति से प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति का निर्णय लिया गया था। वहीँ सचिव की नियुक्ति भी विहीत प्रकिया और विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार हुई है।  कॉलेज के सरकारीकरण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन का उल्लेख करते हुए डॉ. संजय यादव ने कहा कि यह उनके लिए महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि उनके पिता की भी इच्छा थी कि रामलखन सिंह यादव कॉलेज का सरकारीकरण हो। इसी मांग को लेकर वह बिहार में लगातार आंदोलन कर रहे हैं और इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। उनका उद्देश्य कॉलेज को स्थायी और मजबूत व्यवस्था देना है।

15 अगस्त के घटनाक्रम के बाद कॉलेज परिसर की सुरक्षा को लेकर भी सचिव की ओर से जिला प्रशासन और मगध विश्वविद्यालय को आवेदन दिया गया है। इसमें कॉलेज परिसर में सुरक्षा  की व्यवस्था कराने की मांग की गयी है। आवेदन में कहा गया है कि कॉलेज में प्रतिदिन छात्र-छात्राएं, शिक्षक और कर्मचारी आते हैं, इसलिए सुरक्षित वातावरण आवश्यक है। प्रभारी प्राचार्य ने कहा कि कॉलेज के सामने पिछले वर्षों में कई व्यवस्थागत चुनौतियां रही हैं। अब आवश्यकता पुराने विवादों को बढ़ाने के बजाय संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करने की है। उन्होंने कहा कि कॉलेज को राजनीतिक या विवाद का अखाड़ा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की शिक्षा और भविष्य का केंद्र बनाना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि कॉलेज से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान कानून और विश्वविद्यालयीय प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

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बिक्रमादित्य कुमार की रिपोर्ट