LATEST NEWS

  • Bihar News:बिजली के टूटे तार की चपेट में आने से युवक की मौत, बचाने गया बड़ा भाई की हालत गंभीर
  • Bihar News:बिजली के टूटे तार की चपेट में आने से युवक की मौत, बचाने गया बड़ा भाई की

  • रिश्वत की मांग आरोप में MVI से स्पष्टीकरण तलब: परिवहन विभाग ने जारी किया नोटिस, एक सप्ताह में मांगा जवाब
  • रिश्वत की मांग आरोप में MVI से स्पष्टीकरण तलब: परिवहन विभाग ने जारी किया नोटिस, एक सप्ताह में

  • Bihar Pension
  • Bihar Pension News: बिहार में 1.03 करोड़ पेंशनधारियों का जीवन प्रमाणीकरण पूरा, 13.57 लाख का सत्यापन बाकी

  • डीएम जनता दरबार में उमड़ी फरियादियों की भीड़, मौके पर हुआ कई मामलों का हुआ ऑन-द-स्पॉट निष्पादन
  • डीएम जनता दरबार में उमड़ी फरियादियों की भीड़, मौके पर हुआ कई मामलों का हुआ ऑन-द-स्पॉट निष्पादन

  • Bihar Crime:  मेला परिसर में चली गोली, आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी को पीटकर पुलिस को सौंपा
  • Bihar Crime: मेला परिसर में चली गोली, आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी को पीटकर पुलिस को सौंपा

आजादी के 8 दशक बाद भी जमुई के इस गांव को नहीं नसीब हुआ पुल, 250-300 की आबादी बांस-बल्ले के पुल के सहारे गुजार रही जिंदगी

बिहार में अब सड़कों का जाल बिछा हुआ है। प्रदेश के किसी भी कोने से अब राजधानी पहुंचना आसान हो गया है, लेकिन जमुई जिले में एक आज भी एक ऐसा गांव है जहां बरसात के दिनों में 200-300 आबादी को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है....

आजादी के 8 दशक बाद भी जमुई के इस गांव को नहीं नसीब हुआ पुल,
250-300 की आबादी बांस-बल्ले के पुल के सहारे गुजार रही जिंदगी- फोटो : सुमित कुमार

Jamuai : "इंतहा हो गई इंतज़ार की..." यह पंक्तियाँ जमुई जिले के खैरा प्रखंड की हरनी पंचायत अंतर्गत जतहर और कैरवातरी गांव के ग्रामीणों की बदहाली पर सटीक बैठती हैं। आजादी के आठ दशक बीत जाने के बाद भी इस गांव के लोग एक अदद पक्के पुल के लिए तरस रहे हैं। करीब 150 मीटर चौड़ी नदी बरसात के मौसम में उफान पर आते ही इस गांव का संपर्क मुख्यधारा से पूरी तरह काट देती है।

बांस-बल्ले के अस्थायी पुल के भरोसे ग्रामीण

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के खोखले आश्वासनों से तंग आकर अब ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा कर बांस-बल्ले का अस्थायी पुल बनाना शुरू कर दिया है। करीब 250 से 300 की आबादी वाले इन गांवों में, जिनमें विशेष रूप से अनुसूचित जाति समुदाय के लोग रहते हैं, जीवन बेहद कठिन हो चुका है। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी पार कर अरुणमाबांक (सोखो) जाना पड़ता है।

खटोली पर लादकर अस्पताल पहुंचाते है मरीज

गांव में पुल न होने से स्थिति तब भयावह हो जाती है जब कोई बीमार पड़ता है या किसी गर्भवती महिला को इमरजेंसी में अस्पताल ले जाना होता है। एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुँच पाती, जिसके कारण मरीजों को खटोली (चारपाई) पर लादकर नदी पार कराना पड़ता है। पंचायत सरकार भवन और स्वास्थ्य केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाओं तक पहुँचने का एकमात्र ज़रिया भी यही खतरनाक नदी मार्ग है।

स्थानीय विधायक के दावों पर उठे सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि आते हैं और पुल निर्माण का आश्वासन देकर चले जाते हैं। स्थानीय विधायक द्वारा कई बार डीपीआर (DPR) तैयार होने और काम जल्द शुरू होने का दावा किया गया, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं बदला। व्यवस्था से भरोसा टूटने के बाद ही ग्रामीणों ने खुद श्रमदान और चंदे से रास्ता बनाने का बीड़ा उठाया है।

NSIT
Nsmch

प्रशासनिक हलचल: डीएम नवीन ने ग्रामीणों को चर्चा के लिए बुलाया

ग्रामीणों की इस लाचारी की खबर सार्वजनिक होने और मामला तूल पकड़ने के बाद जमुई के जिलाधिकारी (DM) नवीन ने संज्ञान लिया है। डीएम ने गांव के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया है ताकि समस्या को समझकर इसके स्थायी समाधान की योजना बनाई जा सके। अब देखना होगा कि वर्षों से उपेक्षित इस गांव की मांग इस बार भी महज़ आश्वासन बनकर रह जाती है या कोई ठोस कदम उठाया जाता है।

सुमित की रिपोर्ट