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Bihar Politics : 1990 के दशक के चुनाव का जिक्र कर बोले सांसद डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव, ‘2500 वोटों से हरा दिया गया था, री-काउंटिंग में साढ़े 5 हजार से जीता’

Bihar Politics : सांसद डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव ने कहा की 1990 के दशक में हुए एक चुनाव में उन्हें मतगणना के दौरान गड़बड़ी के कारण 2500 वोट से हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन........पढ़िए आगे

Bihar Politics : 1990 के दशक के चुनाव का जिक्र कर बोले सांसद
चुनाव में हार के बाद जीत - फोटो : MANOJ

GAYAJI : जहानाबाद के सांसद डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव ने अपने राजनीतिक सफर के एक बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण पुराने चुनाव का जिक्र करते हुए बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया कि 1990 के दशक में आयोजित एक विधानसभा चुनाव के दौरान मतगणना में भारी गड़बड़ी करके उन्हें 2500 वोटों से हारा हुआ घोषित कर दिया गया था। हालांकि, उन्होंने इस गलत नतीजे को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया और दोबारा गिनती की मांग पर अड़े रहे।

सांसद डॉ. यादव के अनुसार, मतगणना प्रक्रिया के दौरान हुई धांधली को लेकर वे पूरी तरह आश्वस्त थे, इसलिए उन्होंने हार मानने के बजाय तुरंत री-काउंटिंग (पुनर्गणना) की मांग उठाई। उस समय बिहार सरकार में मंत्री रहे अवधेश कुमार सिंह ने मामले में हस्तक्षेप किया, जिसके बाद प्रशासन को दोबारा वोटों की गिनती कराने का आदेश देना पड़ा।

सुरेंद्र यादव ने दावा किया कि जब पारदर्शी तरीके से दोबारा मतगणना कराई गई, तो चुनाव का पूरा परिणाम ही पलट गया। जो चुनाव वे 2500 वोटों से हार रहे थे, पुनर्गणना के बाद वे करीब साढ़े पांच हजार (5,500) वोटों के बड़े अंतर से जीत गए। सांसद ने इस मुश्किल मोड़ पर निष्पक्षता और सहयोग के लिए पूर्व मंत्री अवधेश कुमार सिंह का दिल से शुक्रिया अदा किया।

उन्होंने इस वाकये को अपने राजनीतिक जीवन का एक बेहद निर्णायक और यादगार मोड़ बताया। सांसद ने कहा कि चुनावी गड़बड़ी के सामने घबराने या हार मान लेने के बजाय उन्होंने लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया का सहारा लिया और मजबूती से अपना पक्ष रखा, जिससे अंततः सच्चाई और जनमत की जीत हुई। सांसद द्वारा उजागर किया गया यह किस्सा इस बात का बड़ा उदाहरण है कि सतर्कता और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूकता से चुनावी नतीजों के फेरबदल को भी दुरुस्त किया जा सकता है। पुनर्गणना के बाद सामने आया यह ऐतिहासिक परिणाम उनके राजनीतिक करियर को नई दिशा देने में मील का पत्थर साबित हुआ।

NSIT
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मनोज की रिपोर्ट