Bihar News: शेरघाटी नगर परिषद में घोटालों का साम्राज्य? मुख्य पार्षद-अधिकारी की मिलीभगत पर गंभीर आरोप, सरकार से हाईलेवल जांच की मांग

Bihar News: शेरघाटी नगर परिषद से भ्रष्टाचार का एक बड़ा और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय सियासत से लेकर प्रशासनिक हलकों तक हलचल मचा दी है।

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फाउंटेन से वाटर एटीएम तक घोटाला- फोटो : reporter

Bihar News: गयाजी जिले के शेरघाटी नगर परिषद से भ्रष्टाचार का एक बड़ा और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय सियासत से लेकर प्रशासनिक हलकों तक हलचल मचा दी है। पूर्व मुख्य पार्षद प्रतिनिधि सह भाजपा मीडिया प्रभारी विनय कुमार ने मुख्य पार्षद और कार्यपालक पदाधिकारी पर मिलीभगत कर घोटाले पर घोटाले करने का संगीन आरोप लगाया है। इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने बिहार सरकार के नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को लिखित शिकायत भेजते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

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विनय कुमार के मुताबिक, नगर परिषद में टेंडर प्रक्रिया को सुनियोजित तरीके से प्रभावित कर फर्जी और अपूर्ण दस्तावेज वाली कंपनियों को काम दिया गया। आरोप है कि जय शिव कंस्ट्रक्शन, के. इंटरप्राइजेज और सनराइज इंटरप्राइजेज जैसी फर्मों को बिना वैध कागजात जैसे पैन, जीएसटी और ईएमडी के टेंडर आवंटित किए गए, जो नियमों के खिलाफ है।

सबसे बड़ा घोटाला फाउंटेन और पेंटिंग कार्य में बताया गया है। करीब 1.14 करोड़ रुपये के टेंडर में 70,000 स्क्वायर फीट पेंटिंग का दावा किया गया, लेकिन यह काम तय स्थानों पर नहीं कर नेशनल हाईवे पर कराया गया, जिसकी आवश्यकता ही नहीं थी। प्रति स्क्वायर फीट 163 रुपये से अधिक की दर से भुगतान किया गया, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई गई है।

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इतना ही नहीं, वाटर एटीएम, एलईडी लाइट, ओपन जिम और डिस्प्ले सिस्टम जैसे विकास कार्यों में भी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। शिकायत में कहा गया है कि टेंडर उन्हीं फर्मों को दिए गए, जिनका संबंध मुख्य पार्षद या कार्यपालक पदाधिकारी के करीबी लोगों से है। यहां तक कि एक फर्म नगर परिषद के जेई के पिता के नाम पर रजिस्टर्ड बताई गई है, जबकि दूसरी फर्म टेंडर से महज दो महीने पहले ही अस्तित्व में आई।

विनय कुमार ने निष्पक्ष एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच, संबंधित अधिकारियों के कॉल डिटेल खंगालने और कार्यपालक पदाधिकारी को तत्काल निलंबित करने की मांग की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली पोस्टिंग में भी इसी तरह के दस्तावेजों को गायब करने की कोशिश की गई थी। अब इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है क्या विकास के नाम पर शेरघाटी में वाकई  भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है? जनता और प्रशासन, दोनों की नजरें अब सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

रिपोर्ट- धीरेंद्र कुमार