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NEET Success Story: ट्रक ड्राइवर की बेटी ने लिखी कामयाबी की नई इबारत! परीक्षा रद्द होने पर चली गई थी डिप्रेशन में, चौथे प्रयास में फतह किया NEET

NEET Success Story:हौसले बुलंद हों तो मुफलिसी भी मंज़िल का रास्ता नहीं रोक सकती।....

Truck Driver Daughter Cracks NEET on Fourth Try After Setbac
ट्रक ड्राइवर की बेटी ने लिखी कामयाबी की नई इबारत- फोटो : reporter

NEET Success Story:हौसले बुलंद हों तो मुफलिसी भी मंज़िल का रास्ता नहीं रोक सकती। बिहार के दरभंगा की बेटी कायनात खानम ने इसी जज़्बे की मिसाल पेश की है। एक ट्रक ड्राइवर की बेटी ने तमाम आर्थिक तंगी, लगातार तीन असफलताओं और परीक्षा रद्द होने के सदमे को पीछे छोड़ते हुए चौथे प्रयास में NEET UG परीक्षा पास कर डॉक्टर बनने का सपना साकार कर लिया। उनकी सफलता आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड के मोरवारा गांव निवासी इम्तियाज़ अहमद खान ट्रक चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। कायनात की शुरुआती पढ़ाई नाना-नानी के घर हुई, लेकिन कोरोना महामारी के दौरान वह गांव लौट आईं। ऑनलाइन पढ़ाई में नेटवर्क की परेशानी आने लगी तो पिता ने बेहतर शिक्षा के लिए दरभंगा शहर के रहमगंज में किराये का मकान ले लिया।

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कायनात की मंजिल आसान नहीं थी। उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी की, लेकिन लगातार तीन बार असफल रहीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। वर्ष 2026 में आयोजित परीक्षा में उन्होंने क्वालिफाइंग अंक हासिल किए, लेकिन पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द होने की खबर ने उन्हें गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया। कुछ समय तक वह डिप्रेशन में रहीं, लेकिन उनके शिक्षक सुमित चौबे ने उनका हौसला बढ़ाया और दोबारा तैयारी के लिए प्रेरित किया।

री-नीट परीक्षा को लेकर यह धारणा थी कि प्रश्नपत्र और कठिन होगा, लेकिन कायनात ने डरने के बजाय और ज्यादा मेहनत की। उन्होंने रोजाना 12 से 13 घंटे पढ़ाई की और आखिरकार 720 में से 593 अंक हासिल कर NEET UG में शानदार सफलता प्राप्त की।कायनात कहती हैं कि इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय उनके माता-पिता और शिक्षक को जाता है। उन्होंने बताया कि कई बार परिवार ने भी कहा कि अब तैयारी छोड़ दो, लेकिन उनके गुरु ने भरोसा दिलाया कि एक और प्रयास उन्हें मंजिल तक पहुंचा देगा।

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वहीं पिता इम्तियाज़ अहमद खान की आंखों में बेटी की सफलता की खुशी साफ झलकती है। उन्होंने कहा कि ट्रक ड्राइवर की जिंदगी संघर्षों से भरी होती है, लेकिन बेटी का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने हर मुश्किल का सामना किया। किराये के मकान, पढ़ाई और घर के खर्च के बीच उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। आज उनकी बेटी डॉक्टर बनने की राह पर है और यही उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी कमाई है।कायनात की यह कहानी बताती है कि नाकामयाबी मंजिल का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत होती है। अगर इरादे मजबूत हों, मेहनत ईमानदार हो और परिवार का साथ मिले, तो हर मुश्किल को मात देकर सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है।

रिपोर्ट- वरुण कुमार ठाकुर