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Saran Police:अपराध पर लगाम की नई तैयारी , सारण प्रमंडल के 43 थानों की कमान अब इंस्पेक्टरों के हवाले

Saran Police: सारण प्रमंडल के 43 थानों की कमान इंस्पेक्टर रैंक के अफसरों के हाथों में होगी।....

43 Saran Police Stations Upgraded Inspector Rank Officers Ta
सारण प्रमंडल के 43 थानों की कमान अब इंस्पेक्टरों के हवाले- फोटो : reporter

Saran Police: बिहार में बढ़ते अपराध, कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और अपराधियों के बुलंद हौसलों के बीच पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब सारण प्रमंडल के 43 थानों की कमान इंस्पेक्टर रैंक के अफसरों के हाथों में होगी। सरकार और पुलिस महकमा इसे अपराध पर शिकंजा कसने की नई कवायद बता रहा है, जबकि प्रशासनिक गलियारों में इसे पुलिसिंग को और ज्यादा असरदार बनाने की अहम पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

पुलिस मुख्यालय के आदेश के मुताबिक पूरे बिहार के 217 थानों को अपग्रेड कर पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर) श्रेणी में शामिल किया गया है। इस फैसले के बाद राज्य में इंस्पेक्टर कोटि के थानों की संख्या 208 से बढ़कर 425 हो गई है। इनमें सारण, सिवान और गोपालगंज जिले के कुल 43 थाने भी शामिल हैं।

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सारण जिले के गरखा, दरियापुर, बनियापुर, मशरक, दिघवारा, मांझी, एकमा, परसा और तरैया जैसे महत्वपूर्ण थानों को नई श्रेणी में रखा गया है। वहीं सिवान के बड़हरिया, दरौंदा, गुठनी, दरौली और महाराजगंज सहित 15 थानों को अपग्रेड किया गया है। गोपालगंज जिले के कटेया, भोरे, कुचायकोट, बैकुंठपुर, बरौली और हथुआ जैसे 12 थाने भी अब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के नेतृत्व में संचालित होंगे।

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पुलिस मुख्यालय का मानना है कि जिन थानों में हर वर्ष औसतन 350 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हो रहे हैं, वहां अनुभवी अफसरों की तैनाती से अपराध नियंत्रण, अनुसंधान और निगरानी व्यवस्था में मजबूती आएगी। डीजीपी विनय कुमार के अनुसार यह कदम कानून का राज मजबूत करने और अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

पुलिस अधिकारियों का दावा है कि अब संगीन वारदातों की जांच में तेजी आएगी, लंबित मामलों का निपटारा बेहतर होगा और आम लोगों की शिकायतों पर फौरन कार्रवाई संभव हो सकेगी। अपराध की दुनिया में सक्रिय बदमाशों के लिए यह साफ पैगाम है कि अब थानों में फैसले लेने वाले अफसरों का तजुर्बा और अधिकार दोनों बढ़ चुके हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह प्रशासनिक बदलाव जमीनी स्तर पर अपराध के ग्राफ को कितना नीचे ला पाता है और आम जनता को कितना राहत दिला पाता है।

रिपोर्ट- धर्मेंद्र रस्तोगी