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Bihar News : डीजीपी के तिलक संबंधी बयान पर मचा सियासी भूचाल, राजकुमार चौबे बोले-आहत होगी हिन्दूओं की धार्मिक आस्था

Bihar News : डीजीपी के तिलक संबंधी बयान पर मचा सियासी भूचाल,

BUXAR : बिहार के डीजीपी विनय कुमार के पुलिसकर्मियों के तिलक नहीं लगाने के निर्देश के बाद सियासी भूचाल आ गया है। बीजेपी के पूर्व विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने जहाँ इसकी कड़ी निंदा की है। वहीँ विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने इस निर्देश पर कड़ी आपत्ति दर्ज करायी है। उन्होंने कहा की इस समुदाय के धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। तुष्टिकरण की नीति किसी हालत में जायज नहीं है। 

बताते चलें की बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने पुलिस बल की छवि सुधारने और पेशेवर अनुशासन बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण फरमान जारी किया है। नए निर्देशों के तहत अब ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी वर्दी के साथ किसी भी प्रकार के धार्मिक या निजी सजावटी प्रतीकों का उपयोग नहीं कर सकेंगे। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि वर्दी पहनते समय पुलिस मैनुअल के मानदंडों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है।

डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि "वर्दी के साथ टोपी पहनना एक अनिवार्य अंग है, लेकिन देखा जा रहा है कि कई पुलिसकर्मी इसका पालन नहीं करते। इसके अलावा, अब वर्दी पहनकर तिलक या टीका लगाने पर पूरी तरह रोक होगी। यदि किसी कारणवश टीका लगाया भी है, तो ड्यूटी जॉइन करने से पहले उसे हटाना होगा।" उन्होंने आगे कहा कि वर्दी के साथ दसों अंगुलियों में अंगूठियां पहनना या किसी भी प्रकार का अनावश्यक 'अलंकरण' अनुशासन के खिलाफ है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सिर्फ पुरुष ही नहीं, महिला पुलिसकर्मियों के लिए भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। डीजीपी के अनुसार, ड्यूटी के दौरान महिला कर्मी कान, नाक या चेहरे पर भारी सोने या हीरे के गहने नहीं पहन सकेंगी। साजो-सज्जा के नाम पर केवल प्रतीकात्मक और अत्यंत साधारण आभूषणों की ही अनुमति होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस एक अनुशासित बल है और इसकी एक गरिमा होती है जिसे बनाए रखना हर जवान और अधिकारी की जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए डीजीपी ने 'सोशल मीडिया पॉलिसी' का भी कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि वर्दी में रील बनाना या सेल्फी लेकर 'सेल्फ प्रमोशन' करना वर्जित है। सरकारी पदाधिकारी अपनी विभागीय उपलब्धियों या मुद्दों पर राय रख सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत प्रचार के लिए सरकारी वर्दी का उपयोग करने पर कार्रवाई की जाएगी। डीजीपी ने बताया कि अब तक इस मामले में दर्जनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी किया जा चुका है।

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डीजीपी ने अंत में कहा कि अधूरा ड्रेस कोड (जैसे बेल्ट न लगाना या टोपी न पहनना) अनुशासनहीनता का संकेत है। उन्होंने सभी रेंज आईजी, डीआईजी और जिलों के एसपी को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि इन बदलावों से न केवल पुलिस की कार्यसंस्कृति में सुधार आएगा, बल्कि जनता के बीच पुलिस की एक निष्पक्ष और अनुशासित छवि भी मजबूत होगी।